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रूसी तेल खरीद को लेकर क्या होगा भारत का स्टैंड? विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने किया साफ

भारत की ओर से कच्चे तेल की खरीद पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार (9 फरवरी 2026) को कहा कि हम राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा खरीद के लिए स्रोत तय करेंगे. भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदने और अमेरिका-वेनेजुएला से कच्चा तेल खरीदने पर सहमत हुआ है. इस पर विदेश सचिव ने कहा कि ऊर्जा खरीद के लिए कई स्रोतों को बनाए रखना भारत की रणनीति रही है.

‘सभी देशों को ऊर्जा की सुरक्षित आपूर्ति हो’

विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, ‘भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है. भारत और आसपास के कई अन्य देशों की यह साझा रुचि है कि ऊर्जा की कीमतें स्थिर रहें. सभी देशों को ऊर्जा की सुरक्षित और भरोसेमंद आपूर्ति हो.’ उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां वास्तव में फैसला करती हैं कि कहां से तेल की खरीद करनी है और ये निर्णय मुख्य रूप से बाजार की स्थितियों पर आधारित होते हैं.

रूसी तेल खरीद को लेकर होगा भारत का स्टैंड

भारत की ओर से रूस से तेल खरीदने की योजनाओं के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया, ‘हम एक विकासशील अर्थव्यवस्था हैं. हमें अपने संसाधनों की उपलब्धता के प्रति सचेत रहना पड़ता है. जब हम 80-85 फीसदी तक आयात पर निर्भर हैं तो हमें महंगे दामों के प्रति संवेदनशील होना पड़ता है. ये कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि ऊर्जा के मामले में हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है.’

हम कई देशों से ऊर्जा खरीदते हैं: विदेश सचिव 

विदेश सचिव ने कहा, ‘हाल के वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को काफी अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ा है, जिसका वैश्विक ऊर्जा बाजारों की स्थिरता पर गहरा प्रभाव पड़ा है. भारत सिर्फ एक बड़ा उपभोक्ता देश ही नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है. हम कई देशों से ऊर्जा खरीदते हैं. इस क्षेत्र में जितनी अधिक विविधता होगी, हम उतने ही सुरक्षित रहेंगे.’

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AZMI DESK

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