16 फरवरी से हिमाचल प्रदेश विधानसभा बजट सत्र, RDG पर सरकार–विपक्ष आमने-सामने

हिमाचल प्रदेश सरकार ने विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से आयोजित करने का निर्णय लिया है. राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए सरकार ने विधानसभा का सत्र 16 फरवरी से शुरू करने का फैसला किया है. इस निर्णय को विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचित कर दिया है. सत्र के पहले दिन दोपहर दो बजे के बाद राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल का अभिभाषण होगा.
राज्यपाल की सिफारिश के उपरांत विधानसभा सचिवालय ने इसकी औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी है. राज्यपाल के अभिभाषण के बाद सदन में शोक प्रस्ताव (शोकोदगार) लाए जाएंगे. इसके उपरांत विधायी कार्य प्रारंभ किया जाएगा.
हंगामेदार रहेगा यह सत्र!
राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रदेश में राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद किए जाने को लेकर चल रही सियासत के बीच यह सत्र काफी हंगामेदार रहेगा. केंद्रीय बजट में हिमाचल प्रदेश का राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बंद होने पर सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार सख्ते में है. सरकार ने RDG बंद होने पर विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी नहीं दी और अब सरकार ने 16 फरवरी से बजट सत्र बुलाने का निर्णय लिया है. इसमें RDG पर चर्चा और आगामी वित्त वर्ष के लिए सरकार बजट पेश करेगी.
आर्थिक रूप से संपन्न राज्य नहीं है हिमाचल प्रदेश- CM
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा, “हिमाचल सरकार ने वित्तीय अनुशासन के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के राजस्व में इजाफा किया है, जिसका जमीन पर असर दिखना भी शुरू हो गया है, लेकिन इस बीच केंद्रीय बजट में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद कर दिया गया है, जिसका हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा. हिमाचल प्रदेश आर्थिक रूप से संपन्न राज्य नहीं है, ऐसे में केंद्र की ग्रांट के बिना विकास प्रभावित होगा. हिमाचल भाजपा नेताओं को राजनीति छोड़कर प्रदेश हित में प्रधानमंत्री से मिलकर RDG की बहाली में सरकार का सहयोग करना चाहिए. हिमाचल सरकार BJP के नेतृत्व में भी पीएम मोदी के पास चलने को तैयार है, क्योंकि मामला जनता के हित से जुड़ा हुआ है.”
हिमाचल सरकार को अपने खर्चे कम करने होंगे- BJP
वहीं दूसरी तरफ BJP ने RDG को लेकर सरकार पर आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार हिमाचल की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर नहीं है. RDG के बंद होने के बाद सरकार ने प्रदेश में पांच चेयरमैन नॉमिनेट किए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि वित्तीय प्रबंधन को लेकर सरकार कितनी गंभीर है. प्रदेश सरकार 16वें वित्त आयोग के समक्ष अपने खर्च और आय बढ़ाने को लेकर मजबूती से पक्ष नहीं रख पाई है, जिस कारण RDG बंद होने की जिम्मेदार सरकार है. केंद्रीय बजट में हिमाचल सहित 17 राज्यों का RDG खत्म किया गया है, ऐसे में हिमाचल सरकार को अपने खर्चे कम करने होंगे और आय के साधनों को मजबूत करना होगा.
इस बीच RDG को लेकर कल सुक्खू सरकार ने कैबिनेट मीटिंग भी बुलाई है. साथ ही कैबिनेट के बाद सरकार हिमाचल की आर्थिक स्थिति को लेकर विपक्ष को एक प्रेजेंटेशन देगी, जिसमें RDG बंद होने के आगामी वर्षों में हिमाचल पर क्या-क्या प्रभाव होंगे, यह साझा किया जाएगा. सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी सरकार आने वाले दिनों में विचार कर रही है.
पिछले साल 10 मार्च को हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र शुरू हुआ था, जो 28 मार्च तक चला था. बजट सत्र के दौरान 18 बैठकें आयोजित हुई थीं. हालांकि इस बार बजट सत्र में कितनी बैठकें आयोजित होंगी, इसे लेकर स्थिति साफ नहीं है, लेकिन उम्मीद की जा रही है कि कल यानी रविवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में बजट सत्र की तारीखें तय हो सकती हैं.



