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हिमाचल: विधायक निधि रोके जाने पर भड़का विपक्ष, राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधायक प्राथमिकताओं की बैठकों के आगाज से ठीक पहले हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उबाल आ गया है. आज से शुरू हो रही बैठकों से पूर्व ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में विपक्षी बीजेपी विधायकों ने लोकभवन (राजभवन) पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा. विपक्ष ने राज्य सरकार पर विधायक क्षेत्र विकास निधि, ऐच्छिक निधि रोकने और विपक्षी विधायकों के विकास कार्यों में भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया है.

अक्टूबर 2025 से रुकी है निधि, विकास कार्य ठप राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने अक्टूबर 2025 के बाद से विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी नहीं की है. बजट में प्रावधान होने के बावजूद सरकार ने केवल दो किश्तें (55-55 लाख रुपये) ही जारी की हैं, जबकि शेष राशि रोक दी गई है.

जयराम ठाकुर ने कहा, “इस वर्ष प्राकृतिक आपदा ने प्रदेश में भारी तबाही मचाई है. ऐसे समय में विधायक निधि का उपयोग पुनर्स्थापना और राहत कार्यों के लिए किया जाना अत्यंत आवश्यक था, लेकिन फंड रुकने से विधायकों को जनता से किए गए वादे पूरे करने में भारी कठिनाई हो रही है.” इसके अतिरिक्त, ऐच्छिक निधि न मिलने से गरीब, बीमार और आपदा प्रभावितों को मिलने वाली तत्काल सहायता भी बाधित हो रही है, जिससे जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं.

विपक्षी विधायकों की DPR बनाने में आनाकानी 

विपक्ष ने सरकार पर “समान विकास” की भावना के विपरीत काम करने का आरोप लगाया है. बीजेपी का कहना है कि हिमाचल में यह परंपरा रही है कि विधायक पीडब्ल्यूडी और जल शक्ति विभाग में अपनी प्राथमिकताएं दर्ज कराते हैं. लेकिन पिछले तीन वर्षों से विपक्षी विधायकों द्वारा दी गई प्राथमिकताओं की न तो विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) बनाई जा रही है और न ही उन्हें नाबार्ड (NABARD) की स्वीकृति के लिए भेजा जा रहा है.

राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग 

बीजेपी विधायक दल ने राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने आग्रह किया है कि सरकार को रोकी गई विधायक निधि और ऐच्छिक निधि तुरंत जारी करने के निर्देश दिए जाएं. साथ ही, विपक्षी विधायकों की विकास प्राथमिकताओं की डीपीआर बनाकर जल्द से जल्द नाबार्ड भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि प्रदेश में संतुलित विकास हो सके.

वहीं, विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वे आरडीजी (RDG) पर होने वाले विशेष सत्र में हिस्सा लेंगे और सरकार की नीतियों का विरोध सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी रखेंगे.

AZMI DESK

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