राज्यसभा चुनाव को लेकर राजस्थान कांग्रेस में हलचल तेज, इस नेता ने जताई इच्छा, क्या हैं समीकरण?

राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. दरअसल, इस साल जून में तीन राज्यसभा सीटों पर प्रदेश में चुनाव होने हैं. ऐसे में संख्या बल के आधार पर बीजेपी के दो और कांग्रेस के एक सदस्य का राज्यसभा जाना लगभग तय माना जा रहा है.
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नीरज डांगी का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है और अब अप्रैल-मई माह में चुनाव हो सकता है, लेकिन इस बार कांग्रेस किसे राज्यसभा भेजती है. यह देखने वाली बात होगी. राज्यसभा सीट के बहाने कांग्रेस राजनीतिक हित भी साधने का प्रयास करेगी.
बिछने लगी सियासी बिसात
राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस किसका नाम तय करती है, इसका अंतिम फैसला तो कांग्रेस आलाकमान को करना है, लेकिन उससे पहले प्रदेश में इस चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है. पिछले दिनों प्रदेश के नेताओं का दिल्ली दौरा हुआ इस दौरान भी ये चर्चा रही. वहीं इस बार पार्टी में अंदरखाने स्थानीय नेता को राज्यसभा भेजे जाने की चर्चा भी हो रही है.
रफीक मंडेलिया ने जताई राज्यभा जाने की इच्छा
दिल्ली में पार्टी नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और कांग्रेस महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह के नाम की चर्चा जोरों पर हैं और दोनों ही नेता गांधी परिवार के नजदीकी भी माने जाते हैं. वहीं चूरू से विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ चुके रफीक मंडेलिया भी राज्यसभा जाने की इच्छा जता रहे हैं. इसको लेकर बीते दिनों दिल्ली सहित प्रदेश के कई नेताओं से उनकी मुलाकात की भी जानकारी सामने आई है.
क्या हैं समीकरण?
प्रदेश से राज्यसभा कौन जाएगा इसका फैसला तो दिल्ली आलाकमान को करना है, लेकिन कांग्रेस का कोर वोटर माने जाने वाला मुस्लिम समाज भी अपने किसी नेता को राज्यसभा भेजे जाने की मांग कर सकता है, क्योंकि फिलहाल OBC वर्ग से PCC चीफ है और दलित वर्ग से नेता प्रतिपक्ष ऐसे में किसी जनरल और अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाले नेता को पार्टी राजस्थान से राज्यसभा भेजे जाने पर विचार कर सकती है.
प्रदेश से ये मुस्लिम नेता गए राज्यसभा
राजस्थान से राज्यसभा जाने वाले मुस्लिम नेताओं की अगर बात करें तो 1988 में अबरार अहमद को राजस्थान से राज्यसभा सांसद के लिए चुना गया. इस दौरान वे कई प्रमुख पदों पर रहे. इसके बाद 2010 में अश्क अली टाक को राजस्थान से राज्यसभा भेजा गया. अब तक के आंकड़ों की अगर बात करें तो वर्ष 2011 की जनसंख्या के मुताबिक संसद में मुस्लिम प्रतिनिधित्व न के बराबर रहा है.



