‘क्या यह तुम्हारे बाप की जमीन है?’, चिकन नेक काटने की धमकी देने वालों को अमित शाह की दो टूक

पश्चिम बंगाल दौरे पर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने शनिवार को कहा कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी गलियारा भारत का है और किसी को भी इसको लेकर धमकी देने या इसमें छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. सिलीगुड़ी कॉरिडोर को आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है.
अमित शाह ने सिलीगुड़ी में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि दिल्ली में कुछ लोगों ने नारे लगाए थे कि भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली भूमि की इस संकरी पट्टी ‘चिकन नेक’ को काट देंगे.
यह भारत की जमीन है: अमित शाह
पीटीआई के मुताबिक, केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, ‘दिल्ली में कुछ लोगों ने नारे लगाए कि वे इस ‘चिकन नेक’ को काट देंगे. अरे भाई, तुम इसे कैसे काटोगे? क्या यह तुम्हारे बाप की जमीन है? यह भारत की जमीन है. इस पर कोई हाथ नहीं लगा सकता.’ उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस ने ऐसे नारे लगाने वालों को गिरफ्तार कर लिया है. शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने उनकी रिहाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया था.
विपक्ष ने चिकन नेक काटने की धमकी देने वालों की पैरवी की: शाह
गृहमंत्री ने दावा किया, ‘दिल्ली पुलिस ने उन्हें जेल में डाल दिया. ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने उन्हें रिहा करवाने के लिए हर संभव प्रयास किया. उनके सांसदों ने तो उनकी ओर से पैरवी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक का रुख किया, लेकिन आखिर में सच्चाई की जीत हुई. सुप्रीम कोर्ट ने भी उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी.’
शरजील इमाम ने चिकन नेक को लेकर दिया था भड़काऊ भाषण
जेएनयू से पीएचडी कर रहे शरजील इमाम ने कथित तौर पर कहा था, ‘अगर हमारे साथ लाख संगठित लोग होते तो हम भारत और नॉर्थ-ईस्ट को हमेशा के लिए अलग कर सकते थे. हमेशा के लिए नहीं तो कम से एक महीने के लिए तो अलग कर ही सकते थे. असम को अलग करना हमारी जिम्मेदारी है. असम और भारत अलग हो जाएं. यहां से वहां जाने वाली सारी सप्लाई रोक दो और हम यह कर सकते हैं क्योंकि चिकन नेक मुसलमानों के हाथ में है.’
सिलीगुड़ी कॉरिडोर क्या है?
‘चिकन नेक’ को आधिकारिक तौर पर सिलीगुड़ी गलियारे के नाम से जाना जाता है. यह उत्तरी बंगाल में करीब 20-22 किलोमीटर चौड़ा और करीब 60 किलोमीटर लंबा एक संकरा भूभाग है, जो भारत के शेष भाग को इसके नॉर्थ-ईस्ट राज्यों से जोड़ता है. सुरक्षा और रणनीतिक दोनों ही लिहाज से इसे एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाका माना जाता है.



