IEW 2026: भारत ने नीदरलैंड, जापान, आइसलैंड और अमेरिका के साथ ऊर्जा साझेदारी को दी नई धार

इंडिया एनर्जी वीक के दूसरे दिन भारत ने दुनिया के प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकों के माध्यम से ‘क्लीन एनर्जी’ और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ के क्षेत्र में बड़े समझौतों की ओर कदम बढ़ाए हैं. सचिव स्तर की इन वार्ताओं में हाइड्रोजन, जियोथर्मल और एलएनजी जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया गया.
भारत-नीदरलैंड: जल्द शुरू होगी ‘रणनीतिक साझेदारी’
नीदरलैंड के साथ हुई बैठक में टिकाऊ ऊर्जा इकोसिस्टम बनाने पर चर्चा हुई. दोनों देशों के बीच ग्रीन हाइड्रोजन कॉरिडोर और हाइड्रोजन रिसीविंग स्टेशन बनाने पर सहमति बनी. भारत में इलेक्ट्रोलाइजर बनाने और निर्यात दक्षता बढ़ाने के लिए ‘लास्ट माइल चैनल’ विकसित करने पर विचार किया गया. भारत ने डच कंपनियों को इंजीनियरिंग और नवाचार के लिए भारत में ग्लोबल कैपिसिटी सेंटर (GCC) स्थापित करने का न्योता दिया.
भारत-जापान: हाइड्रोकार्बन और बायोफ्यूल्स पर बड़ा दांव
टोक्यो राउंडटेबल के बाद हुई इस बैठक में ऊर्जा मूल्य श्रृंखला (Energy Value Chain) में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. ONGC और MOL ने दो बड़े ईथेन कैरियर (VLECs) के लिए जॉइंट वेंचर बनाया है. भारत ने अपनी अतिरिक्त इथेनॉल क्षमता और बायोफ्यूल्स के क्षेत्र में जापान को साझेदारी का प्रस्ताव दिया. ऑयल और गैस क्षेत्र में AI, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और ऑटोमेशन (SCADA सिस्टम) को लागू करने पर जापानी कंपनियों के साथ चर्चा हुई.
भारत-आइसलैंड: भू-तापीय (Geothermal) ऊर्जा से रोशन होगा भारत
आइसलैंड की तकनीक और भारत की 10.6 GW की भू-तापीय क्षमता को जोड़ने पर मंथन हुआ. लद्दाख की पुगा घाटी में ONGC के प्रोजेक्ट और अरुणाचल प्रदेश में चिन्हित हॉट स्प्रिंग्स के विकास पर आइसलैंड की कंपनियों (जैसे Geotropy) ने रुचि दिखाई. आइसलैंड, भारत को CO2 से ई-मेथनॉल और फिर उसे ई-एसएएफ (Sustainable Aviation Fuel) में बदलने में मदद करेगा. OIL राजस्थान में अपना पहला CCS प्रोजेक्ट शुरू कर रहा है जो 200 टन CO2 प्रतिदिन कैप्चर करेगा.
भारत-अमेरिका: $13.7 बिलियन के व्यापार को और विस्तार देने की तैयारी
अमेरिका वर्तमान में भारत का छठा सबसे बड़ा ऊर्जा व्यापार भागीदार है. भारतीय कंपनियां अमेरिका में निर्माणाधीन LNG परियोजनाओं में इक्विटी हिस्सेदारी (Equity Participation) लेने की इच्छुक हैं. दोनों देशों ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ सेक्टर विकसित करने के लिए अपनी तुलनात्मक शक्तियों का उपयोग करने पर चर्चा की. अमेरिकी कंपनियों ने भारत के एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन (E&P) क्षेत्र में निवेश करने और गैस व्यापार बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई.



