देश

पेट्रोल-डीजल को GST में लाने और टोल टैक्स रिवाइज करने की मांग, परिवहन संगठनों ने सरकार से लगाई गुहार

देश में बढ़ती महंगाई और परिवहन लागत के बीच ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों पर वसूले जा रहे टोल टैक्स को युक्तिसंगत बनाने की मांग की है. संगठन का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था ने परिवहन क्षेत्र को आर्थिक दबाव में डाल दिया है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है.

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने एबीपी लाइव की टीम से बातचीत के दौरान कहा, परिवहन क्षेत्र को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि सड़क मार्ग से ही देश के लगभग 80 से 90 प्रतिशत माल का आवागमन होता है. ऐसे में ईंधन की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी और टोल टैक्स की असंगत दरें सीधे तौर पर पूरे आर्थिक ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं.

ईंधन और टोल ने बढ़ाई परिचालन लागत

एसोसिएशन के अनुसार एक भारी मालवाहक वाहन की कुल परिचालन लागत का करीब 60 से 65 प्रतिशत हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च हो जाता है. इसके साथ ही बीते कुछ वर्षों में टोल दरों में औसतन 8 से 10 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि हुई है, जबकि सड़कों और सुविधाओं में उसी अनुपात में सुधार नजर नहीं आता.

राजेन्द्र कपूर ने कहा कि, लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों को कई टोल प्लाजा पार करने पड़ते हैं, जिससे समय, ईंधन और धन तीनों की बर्बादी होती है. टोल प्लाजा पर अनावश्यक देरी और अव्यवस्था से परिवहन कार्य और अधिक महंगा और जटिल हो जाता है.

एसोसिएशन की प्रमुख मांगें

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि पेट्रोल एवं डीजल को जीएसटी के अंतर्गत लाया जाए, ताकि ईंधन कीमतों में पारदर्शिता आए और परिवहन लागत घट सके. साथ ही टोल टैक्स की दरों की समीक्षा कर उन्हें युक्तिसंगत बनाया जाए और पूरे देश में वन-नेशन वन-टोल या नेशनल टोल परमिट सिस्टम लागू किया जाए.

टोल प्लाजा पर भ्रष्टाचार रोकने की जरूरत

संगठन ने टोल प्लाजा पर होने वाली अनावश्यक देरी, जबरन वसूली और भ्रष्टाचार पर सख्त रोक लगाने की भी मांग की है. उनका कहना है कि यदि व्यवस्था सुधरे तो परिवहन सुगम होगा और लागत में कमी आएगी.

महंगाई पर नियंत्रण की उम्मीद

एसोसिएशन का मानना है कि परिवहन लागत घटने से माल भाड़ा कम होगा, जिसका सीधा लाभ व्यापारियों, उद्योगों और अंततः आम उपभोक्ताओं को मिलेगा. इससे बाजार में महंगाई पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा.

केंद्रीय बजट 2026-27 से बड़ी उम्मीद

ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि केंद्रीय बजट 2026-27 में यदि इन मांगों पर गंभीरता से विचार किया गया, तो इससे न केवल परिवहन उद्योग को मजबूती मिलेगी, बल्कि देश की आर्थिक सेहत को भी राहत मिलेगी.

AZMI DESK

Related Articles

Back to top button
WhatsApp Join Group!