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UGC कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, जोधपुर के JNVU के छात्रों ने इस फैसले पर क्या कहा?

जोधपुर सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षा और समानता के अधिकार को लेकर लागू किए गए यूजीसी एक्ट 2026 पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी रोक लगा दी है. इस एक्ट के विरोध में देशभर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल इस बिल के अमल पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद देशभर के छात्र संगठनों और विश्वविद्यालय परिसरों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. इसी कड़ी में जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में छात्रों से खास बातचीत की गई.  जेएनयू के छात्रों का कहना है कि यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर लंबे समय से भ्रम और डर का माहौल बना हुआ था.

‘जानकारी की कमी के कारण  फैल रही थी अफवाह’

एक छात्र ने बताया, “हम सभी छात्र एक साथ बैठते हैं, एक साथ पढ़ते हैं और एक साथ रहते हैं. लेकिन इस बिल के आने के बाद छात्रों में अनिश्चितता और डर पैदा हो गया था. जानकारी की कमी के कारण कई तरह की अफवाह फैल रही थीं. सुप्रीम कोर्ट की रोक से अब राहत मिली है.”

एक्ट के समर्थन में भी उठे कुछ स्वर

कुछ छात्र एक्ट के पक्ष में भी वहीं दूसरी ओर, कुछ छात्र इस एक्ट के समर्थन में भी नजर आए. उनका कहना है कि किसी भी नए कानून का शुरुआत में विरोध होता है. एक छात्र ने एंटी-रैगिंग कानून का उदाहरण देते हुए कहा, “जब एंटी-रैगिंग लागू हुआ था तब भी विरोध हुआ था, लेकिन उसके बाद छात्रों के साथ होने वाली प्रताड़ना लगभग खत्म हो गई. उसी तरह यूजीसी एक्ट 2026 में अगर जरूरी संशोधन कर इसे लागू किया जाए तो यह छात्रों के हित में हो सकता है.”

कानून की छात्रा ने उठाया जातिवाद का मुद्दा

जेएनयू में कानून की पढ़ाई कर रही एक छात्रा ने कहा, “शिक्षा में जातिवाद नहीं होना चाहिए, लेकिन सच्चाई यह है कि छात्र राजनीति और खास मौकों पर जातिवाद देखने को मिलता है. मैंने इसे खुद महसूस किया है. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने इस बिल पर रोक लगाई है, अब पूरी जानकारी और स्पष्टता के साथ ही इसे लागू किया जाना चाहिए.”

न्यायिक प्रक्रिया और भविष्य की रणनीति पर नजर

यूजीसी एक्ट 2026 पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद जहां एक ओर छात्रों में राहत है, वहीं दूसरी ओर इसे संशोधन के साथ लागू करने की मांग भी उठ रही है. अब सभी की नजरें आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं.

AZMI DESK

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