‘जयपुर की सड़कों पर बने मंदिरों को हटाया जाए’, HC का आदेश, BJP विधायक बालमुकुंद बोले- ‘मजारों को…’

राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर शहर में सड़कों और फुटपाथ पर बने मंदिरों की वजह से लोगों को हो रही दिक्कतों के मद्देनजर बड़ा फैसला दिया है. हाईकोर्ट ने सड़कों और फुटपाथ पर बने मंदिरों को तत्काल प्रभाव से हटाए जाने के निर्देश दिए हैं.
अदालत ने सिर्फ मंदिरों को लेकर ही आदेश जारी किया है, लिहाजा इस पर सियासत शुरू हो गई है. बीजेपी के विधायक स्वामी बालमुकुंद आचार्य ने कोर्ट से इस मामले में पुनर्विचार की गुहार लगाई है और साथ ही कहा है कि अगर मंदिर हटाए जाने हैं तो साथ ही ट्रैफिक में रुकावट पैदा करने वाली मस्जिदों और मकबरों को भी हटाया जाना चाहिए. अब देखना यह होगा कि राजस्थान सरकार इस फैसले का पालन करती है या फिर इसे ऊपर की अदालत में चुनौती देती है. हाईकोर्ट इस मामले में 4 फरवरी को फिर से सुनवाई करेगा.
सनी मीणा ने लगाई थी याचिका
दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच का यह आदेश वैसे तो 21 जनवरी का है लेकिन जजमेंट बुधवार की रात को अपलोड होने के बाद सामने आया है. हाईकोर्ट ने यह आदेश जयपुर शहर के ही प्रताप नगर इलाके में फुटपाथ पर बनाए गए मंदिर को हटाए जाने की मांग को लेकर सनी मीणा द्वारा दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है.
हालांकि सनी मीणा द्वारा दाखिल की गई जनहित याचिका में सिर्फ प्रताप नगर इलाके के ही मंदिर को लेकर गुहार लगाई गई थी, लेकिन अदालत ने इस पर सुओ मोटो लेते हुए पूरे जयपुर शहर के लिए आदेश पारित किया है. एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में माना है कि सड़कों और फुटपाथ पर बने मंदिरों की वजह से आम लोगों को आने-जाने में खासी दिक्कतें होती हैं.
‘मूर्तियों को पास के मंदिरों में किया जाए शिफ्ट’
अक्सर ट्रैफिक जाम हो जाता है. डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि सड़कों और फुटपाथ पर बने मंदिरों की मूर्तियों को पास के दूसरे मंदिरों में शिफ्ट कर दिया जाए और स्ट्रक्चर को गिरा दिया जाए.
हालांकि जयपुर शहर में सड़कों और फुटपाथों पर दूसरे विभिन्न धर्मो के भी धार्मिक स्थल हैं, लेकिन अदालत का आदेश सिर्फ मंदिरों को हटाए जाने को लेकर है. हाईकोर्ट ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों को 4 फरवरी को प्रोग्रेस रिपोर्ट देने को कहा है.
जयपुर की सड़कों पर बने हैं कई मंदिर
वैसे जयपुर की अगर बात की जाए तो पुराने शहर में तमाम जगहों पर सड़कों के बीचों-बीच कई मंदिर मिल जाएंगे. छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ के आसपास तो सड़कों और फुटपाथों पर कई मंदिर हैं. हालांकि सिर्फ मंदिर ही नहीं बल्कि दूसरे धर्मों के स्थल भी ट्रैफिक में रुकावट पैदा करते हैं. चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी के बंगले के ठीक बाहर की मजार की वजह से अक्सर ट्रैफिक बाधित होता है.
केस से जुड़े हुए हाउसिंग बोर्ड के अधिवक्ता अजय शुक्ला का कहना है कि मामला सिर्फ एक मंदिर का था, लेकिन हाईकोर्ट ने अब पूरे शहर के मंदिरों को लेकर आदेश जारी किया है.
बहरहाल हाईकोर्ट का आदेश सिर्फ मंदिरों को लेकर है, लिहाजा अब इस पर सियासत भी शुरू हो गई है. जयपुर शहर की हवामहल विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक स्वामी बालमुकुंद आचार्य ने इस फैसले को लेकर निराशा जताई है.
मस्जिदों- मजारों को भी हटाना चाहिए- बालमुकुंद
उनका कहना है कि अदालत के फैसले का पूरा सम्मान है, लेकिन अगर मंदिरों की वजह से ट्रैफिक जाम होता है और लोगों को आवागमन में दिक्कत होती है तो मस्जिदों और मकबरों की वजह से भी ऐसा होता है. ऐसे में यह नियम सभी पर लागू होना चाहिए.
विधायक स्वामी बालमुकुंद आचार्य के मुताबिक अदालत के फैसले का सम्मान तो है लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था का भी सम्मान होना चाहिए. उन्होंने हाईकोर्ट से अपने इस फैसले पर फिर से विचार करने की गुहार लगाई है. साथ ही यह भी कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह इस फैसले को चुनौती भी देंगे.
कांग्रेस ने क्या कहा?
दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर सधी हुई प्रतिक्रिया दी है. जयपुर शहर की किशनपोल सीट से कांग्रेस के विधायक अमीन कागजी ने इसे लेकर सरकार और बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा है कि मौजूदा सरकार हिंदुत्व की बात तो करती है लेकिन मंदिरों की रक्षा भी नहीं कर पा रही है.
अमीन कागज़ी ने सरकार को इस बारे में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए. उनके मुताबिक लोगों को ट्रैफिक में दिक्कत नहीं होनी चाहिए लेकिन साथ ही धार्मिक स्थलों का सम्मान भी जरूरी है.
सरकार के सामने चुनौती
वहीं इस मामले में राजस्थान सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है. वह दोराहे पर है. उसे तय करना बाकी है कि इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाना है या फिर इसे अदालत में चुनौती देनी है. सरकार के सामने मुश्किल यह है कि अदालत के आदेश का पालन नहीं होने पर अवमानना का केस बन सकता है, जबकि मंदिरों को हटाए जाने से हिंदुत्व वाली छवि प्रभावित होने की आशंका है. अब देखना यह होगा कि 4 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की तरफ से क्या कुछ कहा जाता है.



