69000 शिक्षक भर्ती विवाद फिर गरमाया, आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लखनऊ में करेंगे आंदोलन

उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती मामले में एक बार फिर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी दो फरवरी 2026 से लखनऊ में अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन करेंगे. अभ्यर्थियों का आरोप है की इस प्रकरण पर सरकार कोई पहल नहीं कर रही जिस कारण से मामला लटकता चला जा रहा. इस प्रकारण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर माह 2024 में हुई थी उसके बाद से लगातार के तारीख पर तारीख मिल रही है. इस प्रकारण की अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी.
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा की इस प्रकरण के निस्तारण के लिए सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही है. जिसके चलते सुप्रीम कोर्ट से डेट मिल रही. उन्होंने कहा कि वे दो फरवरी से आंदोलन करेंगे. आंदोलन के शुरुआत में बनाये गये सभी जिला कोऑर्डिनेटर से ब्लाक स्तर पर सम्पर्क कर आने वाले अभ्यर्थियों व उनके परिजनों की सूची बनाने को कहा गया है. इसके साथ ही 31 जनवरी की शाम तक संख्या का विवरण आयेगा उसके आधार पर विधानसभा घेराव का आह्वान किया जायेगा.
ओबीसी आयोग और लखनऊ हाईकोर्ट का फैसला पक्ष में
अमित मौर्य ने कहा की इस प्रकरण पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट डबल बेंच का फैसला सब हमारे पक्ष में है, लेकिन फिर भी हमारे साथ अन्याय इसलिए किया जा रहा है. क्योंकि हम पिछड़े और दलित समाज से आते हैं.
छह सालों से कर रहे संघर्ष
विक्रम यादव ने कहा कि हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी पिछले लगभग छह वर्ष से लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं. सरकार से मांग करते हैं, लेकिन हमारी बात नहीं सुनी जा रही. सुनवाई न होने से सभी अभ्यर्थी आहत हैं.
माना जा रहा ओबीसी अभ्यर्थियों के आन्दोलन से प्रदेश में सियासी माहौल गर्म होगा. बीते कई सालों से भर्ती की ओर नजर गड़ाए इन अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लग रही है.



