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लंबे जाम से मिलेगा छुटकारा, अवैध दुकानों पर दिल्ली HC सख्त- ‘कोई बाधा डालने की कोशिश न करे’

आए दिन लंबे जाम से परेशान राजधानी को दिल्ली हाई कोर्ट के तरफ राहत मिलने जा रहा है. दिल्ली के आनंद विहार अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के बाहर अनधिकृत रूप से सड़कों पर दुकानें लगाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त आदेश दिए हैं. न्यायालय ने वेंडरों की राहत याचिका खारिज करते हुए एमसीडी को अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है. यह आदेश 28 जनवरी को सुनवाई के दौरान दिया गया.

हाई कोर्ट का आदेश और कार्रवाई की समयसीमा

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की पीठ ने कहा कि आनंद विहार आईएसबीटी के बाहर भारी भीड़ और ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण अवैध वेंडिंग है. अदालत ने निर्देश दिया कि एमसीडी संबंधित क्षेत्र के एसएचओ या डीसीपी के साथ समन्वय कर सभी अनधिकृत वेंडरों को हटाने के लिए कदम उठाए. हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वेंडरों को अपना सामान हटाने के लिए उचित समय दिया जाए. 

आदेश के अनुसार, एमसीडी 30 जनवरी तक सभी वेंडरों को अदालत के निर्देशों की जानकारी देगी और 31 जनवरी से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू होगी. अदालत ने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई में कोई भी व्यक्ति बाधा डालने की कोशिश नहीं करेगा.

कौन वेंडर रह सकेंगे, किन शर्तों पर अनुमति

सुनवाई के दौरान एमसीडी ने अदालत को बताया कि टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) का सर्वे पूरा हो चुका है, जिसमें केवल 105 वेंडर ही योग्य पाए गए हैं. इन योग्य वेंडरों को प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (सीओवी) जारी किए गए हैं. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टीवीसी सर्वे में योग्य पाए गए अन्य विक्रेता तभी सामान बेच सकेंगे, जब उन्हें अस्थायी सीओवी जारी किया जाएगा. बिना सीओवी के किसी भी प्रकार की हाकिंग को अवैध माना जाएगा. अदालत ने यह भी दोहराया कि फुट ओवरब्रिज, सड़कों और फुटपाथों पर किसी भी स्थिति में हाकिंग की अनुमति नहीं होगी.

यात्रियों की सुविधा के लिए नई योजना और सुंदरीकरण

हाई कोर्ट ने माना कि आईएसबीटी क्षेत्र में सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण पूरी तरह गलत है और पूरे इलाके का पुनर्विकास जरूरी है. अदालत ने निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटने के बाद एमसीडी और लोक निर्माण विभाग मिलकर एक व्यापक सुंदरीकरण योजना तैयार करें.

इस योजना में यात्रियों के लिए भोजनालय, स्वच्छ शौचालय, कैफे, बैठने की जगह और सीमित संख्या में व्यवस्थित दुकानें शामिल होंगी, ताकि आने-जाने में कोई रुकावट न हो. जागराण के अनुसार, अदालत ने कहा कि सार्वजनिक रास्ते खुले रहने चाहिए और यात्रियों व पर्यटकों को बस स्टैंड या पास के रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. हाई कोर्ट ने एमसीडी को 10 मार्च तक इस योजना की प्रति अदालत में पेश करने का निर्देश दिया.

AZMI DESK

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