‘कल्याण में शिवसेना से हाथ मिलाने से पहले MNS को हमें…’, उद्धव गुट का बड़ा बयान

महाराष्ट्र निकाय चुनाव के बाद भी प्रदेश में सियासत तेज है. इस बीच शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के एक नेता ने रविवार (25 जनवरी) को कहा कि कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में एकनाथ शिंदे-नीत शिवसेना के साथ हाथ मिलाने के फैसले की जानकारी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) को पहले उद्धव ठाकरे-नीत पार्टी को देनी चाहिए थी.
युवा सेना के सचिव वरुण सरदेसाई की टिप्पणी कुछ दिनों बाद आई है, जब एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति को ‘गुलामों का बाजार’ बताते हुए अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ मंच पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया था.
‘हमारे साथ करनी चाहिए थी चर्चा’
सरदेसाई ने पत्रकारों से कहा, “एमएनएस एक अलग पार्टी है. मुझे उन्हें यह बताने की ज़रूरत नहीं कि क्या करना चाहिए. मैं यह कल्याण-डोंबिवली के संदर्भ में कह रहा हूं. हमने साथ में चुनाव लड़ा था. अगर उन्हें अलग निर्णय लेना था, तो उन्हें इसके बारे में हमारे साथ चर्चा करनी चाहिए थी. चर्चा के बाद इसका कोई समाधान निकाला जा सकता था.”
‘यह हमारी एकमात्र अपेक्षा थी’
उन्होंने कहा कि यह हमारी एकमात्र अपेक्षा थी. उन्होंने बताया कि शिवसेना (यूबीटी) के पास केडीएमसी में 11 पार्षद हैं और एमएनएस के पास पांच हैं.
फैसले के पीछे मनसे ने क्या कहा?
बता दें कि कल्याण-डोंबिवली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (केडीएमसी) चुनाव के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने एकनाथ शिंदे की शिवसेना को अपना समर्थन दिया था. इस कदम के पीछे की वजह बताते हुए मनसे के पूर्व विधायक राजू पाटिल ने कहा था कि यह फैसला राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और सत्ता की लड़ाई के बजाय स्थानीय विकास को प्राथमिकता देने के लिए लिया गया है.
उद्धव गुट को लगा था झटका
वहीं केडीएमसी में शिंदे गुट को समर्थन देने के मनसे के फैसले के बाद शिवसेना-यूबीटी को एक बड़ा झटका लगा था, क्योंकि दोनों भाइयों ने बृहन्मुंबई नगर निगम और अन्य नागरिक निकायों के चुनाव ‘मराठी मानुष’ और मराठी पहचान के ‘हितों की रक्षा’ के साझा मुद्दे पर लड़े थे.
पार्टी के पार्षदों के समूह को रजिस्टर करने के बाद कोंकण भवन में मीडिया से बात करते हुए राजू पाटिल ने कहा था, “संख्याओं का खेल और पाला बदलने का लगातार खतरा खत्म नहीं हो रहा था. यह अराजकता आने वाले समिति चुनावों में भी जारी रहने की संभावना थी. शहर में स्थिरता लाने के लिए हमने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने का फैसला किया.



