‘गुंडों की सरकार को जनता ने कूटकर भगाया’, सोनभद्र में मंत्री जायसवाल का विपक्ष पर हमला

उत्तर प्रदेश दिवस के मौके पर सोनभद्र पहुंचे प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री रविंद्र जायसवाल ने ऐसे बयान दिए जिन्होंने प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है. विपक्ष पर सीधा हमला बोलते हुए मंत्री जायसवाल ने कहा कि पहले गुंडों की सरकार थी, गुंडे या तो मंत्री थे या फिर गुंडों के संरक्षण में सत्ता चल रही थी. जब जनता ने उन्हें कूटकर सत्ता से बाहर किया, तब भारतीय जनता पार्टी को मौका मिला.
रविंद्र जायसवाल के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक सीधे तौर पर सत्ता बनाम जंगलराज की बहस के रूप में देख रहे हैं. बयान के तुरंत बाद जिले की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं. विपक्षी दल इस बयान को भाजपा की राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थक इसे सच्चाई का आईना मान रहे हैं.
मंत्री जायसवाल ने अपने बयान में यह भी कहा कि आज सरकार की नीतियां साफ हैं और सब कुछ पारदर्शी तरीके से हो रहा है. उन्होंने कहा कि पहले जो माहौल था, वह अब नहीं रहा. अब विकास की राजनीति हो रही है, गुंडागर्दी की नहीं.
माघ मेले पर AI वाला बयान, संत समाज में हलचल
माघ मेले में संत अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर पूछे गए सवाल पर रविंद्र जायसवाल ने चौंकाने वाली टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो कुछ दिखाया जा रहा है, वह सब AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का खेल है. इस बयान ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में भी खलबली मचा दी है.
संत समाज में इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है. कुछ लोग इसे आधुनिक तकनीक के दुरुपयोग की ओर इशारा मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे आस्था पर सवाल उठाने वाला बयान बता रहे हैं. हालांकि मंत्री जायसवाल ने साफ किया कि वह सिर्फ उस विवाद की बात कर रहे थे जो मेले में उठा था.
गेरुआ पहनकर गुमराह करने वालों पर निशाना
रविंद्र जायसवाल यहीं नहीं रुके. उन्होंने रामायण काल का उदाहरण देते हुए कहा कि रामायण में भी गेरुआ वस्त्र पहनकर एक व्यक्ति ने हनुमान जी को भ्रमित करने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग गेरुआ पहनकर समाज को गुमराह कर रहे हैं. इस बयान को संत समाज और राजनीतिक साधुओं पर सीधा कटाक्ष माना जा रहा है. हालांकि मंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे हाल के कुछ विवादों से जोड़कर देख रहे हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान उन लोगों के लिए है जो धर्म की आड़ में राजनीति कर रहे हैं.
राजभर बनाम राजभर पर साधा गया तंज
अनिल राजभर और ओमप्रकाश राजभर के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव पर पूछे गए सवाल को मंत्री ने हल्के लेकिन तीखे अंदाज में टालते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे को क्या कह रहे हैं, यह वही जानें. यह बयान साफ संकेत देता है कि भाजपा इस आंतरिक संघर्ष से खुद को अलग रख रही है.
राजभर समुदाय की राजनीति में यह टकराव लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है. ओमप्रकाश राजभर सुभासपा के अध्यक्ष हैं और समाजवादी पार्टी के सहयोगी हैं, जबकि अनिल राजभर भाजपा के साथ जुड़े हुए हैं. दोनों के बीच का यह विवाद पूर्वांचल की राजनीति को प्रभावित करता रहा है.
सरकारी योजनाओं पर बड़े दावे
सरकार की योजनाओं को लेकर रविंद्र जायसवाल ने कहा कि पहले प्रधानमंत्री कहते थे कि 100 रुपये भेजते हैं तो 15 रुपये पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि अब जमाना बदल गया है, सब कुछ ऑनलाइन है और पैसा सीधे जनता के खाते में जाता है. यह बयान भ्रष्टाचार मुक्त शासन के भाजपा के दावे को मजबूत करता है. मंत्री ने कहा कि अब कोई बिचौलिया नहीं है और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है. उन्होंने डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर की तारीफ करते हुए कहा कि इससे पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार पर लगाम लगी है.
सोनभद्र को बताया निवेश का हॉटस्पॉट
प्रभारी मंत्री ने सोनभद्र को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा कि सोनभद्र ऐसा जिला है जहां हर कोई निवेश करना चाहता है. उन्होंने इसे सरकार की नीतियों और कानून-व्यवस्थता का परिणाम बताया. मंत्री ने कहा कि जिले में औद्योगिक माहौल बेहतर हुआ है और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है.
सोनभद्र खनिज संपदा से भरपूर जिला है और यहां कई बड़ी औद्योगिक इकाइयां पहले से मौजूद हैं. मंत्री जायसवाल ने कहा कि सरकार लगातार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काम कर रही है और जिले का विकास तेजी से हो रहा है.
यूपी दिवस पर दिया गया बयान बना राजनीतिक धमाका
यूपी दिवस के अवसर पर दिया गया रविंद्र जायसवाल का यह बयान सिर्फ सोनभद्र या उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा. गुंडों की सरकार, AI का खेल, गेरुआ पहनकर गुमराह करने वाले जैसे शब्दों ने इसे राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना दिया है. विपक्ष की प्रतिक्रिया का अभी इंतजार है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान नई सियासी जंग की शुरुआत हो सकता है. आने वाले दिनों में इस बयान पर विपक्ष की प्रतिक्रिया और भाजपा का रुख साफ होगा. फिलहाल यह बयान प्रदेश की राजनीति में नई बहस का विषय बन गया है.



