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कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोसी बैराज में प्रवासी पक्षियों की बढ़ी मुश्किलें, पानी घटने से रूडी शेल डक पर संकट

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के आसपास फैले जलाशय सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों के लिए किसी सुरक्षित आश्रय से कम नहीं होते. जैसे ही ठंड की दस्तक होती है, यहां की नदियों, झीलों और बैराजों में तरह-तरह के पक्षियों की आवाज़ें गूंजने लगती हैं.

रामनगर स्थित कोसी बैराज भी ऐसा ही एक अहम स्थान है, जहां हर साल सर्दियों में बड़ी संख्या में रूडी शेल डक यानी ब्राह्मणी बतख प्रवास के लिए पहुंचती हैं और पूरे इलाके में प्राकृतिक रौनक बिखेर देती हैं.

अक्टूबर से अप्रैल तक रहता है डेरा

पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार रूडी शेल डक अक्टूबर से अप्रैल तक इस क्षेत्र में प्रवास करती हैं. अक्टूबर के महीने से ही इनका आगमन शुरू हो जाता है और दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की ठंड में इनकी संख्या सबसे अधिक देखने को मिलती है.

माना जाता है कि ये पक्षी ऊंचे हिमालयी इलाकों से आते हैं, जहां सर्दियों में जल स्रोत जम जाते हैं. खुले पानी और पर्याप्त भोजन की तलाश में ये कोसी बैराज जैसे जलाशयों की ओर रुख करते हैं. मार्च-अप्रैल में मौसम के गर्म होते ही ये वापस अपने मूल निवास की ओर लौट जाते हैं.

बर्ड वॉचर्स के लिए आकर्षण का केंद्र

कोसी बैराज में रूडी शेल डक की मौजूदगी प्रकृति प्रेमियों और बर्ड वॉचर्स के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होती. देश-विदेश से आने वाले पक्षी प्रेमी यहां इन खूबसूरत पक्षियों को देखने पहुंचते हैं. स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में सुबह-शाम बैराज के आसपास पहुंचकर इनकी जलक्रीड़ा और झुंड में उड़ान का आनंद लेते हैं.

पानी कम होने से बढ़ी मुश्किलें

हालांकि इस बार सिंचाई विभाग द्वारा कराए जा रहे कार्यों ने इन प्रवासी पक्षियों की परेशानी बढ़ा दी है. काम के चलते बैराज में पानी का स्तर काफी कम कर दिया गया है.

पानी घटने से न सिर्फ पक्षियों की जलक्रीड़ा कम दिखाई दे रही है, बल्कि उनके भोजन पर भी असर पड़ा है. रूडी शेल डक मुख्य रूप से पानी में पनपने वाली काई और शैवाल पर निर्भर रहती हैं, लेकिन पानी की कमी से इनका भोजन संकट में नजर आ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह कार्य अप्रैल के बाद शुरू किया जाता, तो न पक्षियों को परेशानी होती और न ही विभाग के काम में दिक्कत आती. वहीं वेस्टर्न सर्किल के कंजर्वेटर साकेत बडोला के अनुसार कॉर्बेट के आसपास के जलाशय विश्व के महत्वपूर्ण बर्ड एरिया में गिने जाते हैं.

इनका संरक्षण न केवल पक्षियों के लिए, बल्कि पर्यटन और स्थानीय लोगों की आजीविका के लिए भी बेहद जरूरी है. ऐसे में विकास कार्यों के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों की जरूरतों का संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत है.

AZMI DESK

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