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UGC पर अलंकार अग्निहोत्री का केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद पर तंज, ‘उन्हें चूड़ियां और घुंघरू…’

यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट से रोक के बाद भी इसे लेकर राजनीति जारी है. केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों पर बयान देकर चर्चा में आए निलंबित सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अब केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद को घेरा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें समाज चूड़ियां और घुंघरू भेज दे ताकि शर्म आ जाए. उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के नेता ने एक बार भी यूजीसी और एससी-एसटी को लेकर अपनी आवाज नहीं उठाई.

अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद पर आरोप लगाते हुए कहा, ”पहले ब्राह्मण चेतना परिषद बनाकर सवर्णों के नाम बने PWD मंत्री अब UGC पर चुप्पी साधे हुए हैं, वो इसीलिए शांत हैं क्योंकि सत्ता के बड़े इलेक्ट्रॉनिक और वाणिज्य कर प्रौद्योगिकी जैसा बड़ा मंत्रालय में वो मौज काट रहे हैं.

आवाज उठाने की बजाय वो सोए हैं- अलंकार अग्निहोत्री

अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत के दौरान सवर्णों की बात को रखते हुए कहा, ”ये वही जितिन प्रसाद हैं जो ब्राह्मण चेतना बनाकर पहले PWD मंत्रालय में मौज किये. अब सवर्णों के बीच से सांसद बनकर सत्ता की वाहवाही लूट समाज की साख डूबा रहे हैं. सामान्य और एससी-एसटी वर्ग को अलग अलग कर दिया है. अपने समाज के लिए जागने वाला आवाज उठाने की बजाय सोया हुआ है. दुबई, सहित विदेशों में करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाने में लगा है.”

543 सीट पर चुनाव लड़ेंगे- अलंकार अग्निहोत्री

उन्होंने कहा, ”आपके यहां के सांसद जितिन प्रसाद को बढ़िया घुंघरू, चूड़ियां भेज दो, उन्हें मेल करो. उन्होंने ब्राह्मण चेतना परिषद बनाई है. उसी के नाम पर PWD मंत्रालय ले ली, उसके बाद वाणिज्य एवं इलैक्ट्रोनिक प्रौद्योगिकी मंत्रालय लिए बैठे हैं. ये सब सवर्ण समाज के जनप्रतिनिधियों को आइना दिखाने का काम करेंगे. माता प्रसाद पांडे का फोन आया तो उससे पहले तुम कर लेते. 543 सीट पर चुनाव लड़ेंगे.”

अलंकार अग्निहोत्री को यूपी सरकार ने किया था निलंबित

सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के ठीक बाद यूपी सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था. दरअसल, अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों, खासकर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई थी. उनका आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और कैंपस में जातिगत असंतोष पैदा कर सकते हैं. 

इसके अलावा, उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े एक विवाद का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रशासन ने सनातन संस्कृति के प्रतीकों और संतों का अपमान किया. उन्होंने आरोप लगाया था कि डीएम के कैंप ऑफिस में उन्हें रातभर बंधक बनाकर रखने की कोशिश की गई.

AZMI DESK

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