‘अगर उनकी पालकी से…’, अविमुक्तेश्वरानंद पर भड़के किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास, बताया सियासी गुलाम

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती धरना दे रहे हैं. योगी सरकार के खिलाफ चल रहे उनके इस धरने पर किन्नर अखाड़े के संस्थापक आचार्य ऋषि अजय दास ने निशाना साधा है.
जयपुर में मीडिया से बात करते हुए किन्नर अखाड़े के संस्थापक ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के धरने को राजनीति से प्रेरित बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से धरना दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि योगी सरकार को बदनाम करने के लिए विपक्ष के साथ मिलकर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद धरना दे रहे हैं. आचार्य ऋषि अजय दास के मुताबिक शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने तुलसी पीठाधीश्वर जगतगुरु रामभद्राचार्य के बारे में भी अनर्गल टिप्पणी की है.
अजय दास ने अविमुक्तेश्वरानंद से पूछे सवाल
अजय दास ने सवाल पूछते हुए कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को बताना चाहिए कि अगर रामभद्राचार्य स्वयंभू जगतगुरु है तो क्या वह स्वयंभू शंकराचार्य नहीं हैं? गुरु भाई शंकराचार्य सदानंद को छोड़कर उन्हें किसी दूसरे शंकराचार्य का समर्थन क्यों नहीं है? साथ ही ये भी कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद जिस परंपरा से संबंध रखते हैं, वो हमेशा एक खास पार्टी से जुड़े रहे हैं.
किन्नर अखाड़े के संस्थापक अजय दास ने कहा कि अगर उनकी (अविमुक्तेश्वरानंद) की पालकी से भगदड़ मच जाती या कोई हादसा हो जाता तो उसका जिम्मेदार कौन होता. पालकी के साथ स्नान करने की परंपरा सिर्फ कुंभ और महाकुंभ में होती है. उसके लिए प्रशासन एक अलग से रास्ता रिजर्व रखता है.
‘संत सियासी पार्टियों के गुलामों की तरह काम कर रहे’
अजय दास ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद राजनीतिक दलों के इशारे पर इस तरह का काम कर रहे हैं. इस तरह का काम कतई नहीं करना चाहिए. आस्था के मेले में राजनीति नहीं होनी चाहिए. अविमुक्तेश्वरानंद जैसे संत सियासी पार्टियों के गुलाम की तरह काम कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि पहले संत महात्मा सत्ता को नियंत्रित करते थे लेकिन आज इनके जैसे लोग चाटुकार बनकर रह जाते हैं.
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