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आगरा | अकोला ब्लॉक से रिपोर्ट

ताजनगरी आगरा के अकोला क्षेत्र में स्मार्ट मीटरों को लेकर simmer कर रहा असंतोष अब खुली बगावत में बदल गया है। शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपने घरों से स्मार्ट मीटर उखाड़ डाले और उन्हें सीधे बिजलीघर में लाकर ढेर लगा दिया। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि सिस्टम के खिलाफ एक सीधा संदेश माना जा रहा है।

सुबह देवी मंदिर परिसर में शुरू हुई बैठक जल्द ही उग्र आंदोलन में बदल गई। “स्मार्ट मीटर हटाओ” के नारों के साथ ग्रामीणों का हुजूम सड़कों पर उतर आया। बाजार से गुजरता हुआ यह जनसैलाब बिजलीघर तक पहुंचा, जहां गुस्से का विस्फोट साफ दिखाई दिया। इस विरोध में महिलाओं की बड़ी भागीदारी ने आंदोलन को और धार दे दी।

🔴 ग्रामीणों के आरोप—“बिजली नहीं, लूट का मीटर”

ग्रामीणों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके बिजली बिल 2 से 3 गुना तक बढ़ गए हैं। कई परिवारों ने आरोप लगाया कि:

  • पहले जहां 800–1000 रुपये बिल आता था, अब वही 3000–4000 रुपये तक पहुंच रहा है
  • शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं
  • मीटर रीडिंग और बिलिंग प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध

लोगों ने इसे “डिजिटल लूट” तक करार दिया।

बिजली विभाग पर सीधा हमला

प्रदर्शनकारियों ने साफ आरोप लगाया कि:

“UPPCL जानबूझकर गलत बिलिंग कर रहा है और उपभोक्ताओं को परेशान कर रहा है।”

ग्रामीणों का गुस्सा इस कदर बढ़ा कि उन्होंने कानून अपने हाथ में लेते हुए मीटर उखाड़ दिए—जो प्रशासन के लिए बड़ा संकेत है।

🚜 किसान यूनियन की चेतावनी

आंदोलन की अगुवाई कर रही भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने दो टूक कहा:

  • स्मार्ट मीटर योजना तुरंत रोकी जाए
  • सभी विवादित बिलों की निष्पक्ष जांच हो
  • दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो

साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन जिला स्तर से राज्य स्तर तक जाएगा।

⚠️ UPPCL के लिए खतरे की घंटी

यह घटना सिर्फ अकोला तक सीमित नहीं मानी जा रही। जिस तरह से जनता सड़कों पर उतरी है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि:

  • स्मार्ट मीटर योजना पर भरोसा कमजोर हो रहा है
  • बिलिंग सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो चुके हैं
  • यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो अन्य जिलों में भी यही हाल हो सकता है

🧭 निष्कर्ष (UPPCL के लिए सीधा संदेश)

यह विरोध केवल मीटर का नहीं, बल्कि विश्वास का संकट है। अगर विभाग ने जल्द जवाबदेही नहीं दिखाई, तो “स्मार्ट मीटर” पूरे प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है।

AZMI DESK

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