‘तमिलनाडु नहीं रहेगा चुप’, परिसीमन पर स्टालिन की मोदी सरकार को खुली चेतावनी, कहा- सड़क पर उतरेगा हर परिवार

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन (M. K. Stalin) ने प्रस्तावित परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है. उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर इस प्रक्रिया से तमिलनाडु या दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान पहुंचा तो राज्य में बड़े पैमाने पर आंदोलन होगा और पूरा प्रदेश ठप हो सकता है.
एमके स्टालिन ने 14 अप्रैल को वीडियो जारी कर कहा, ‘इस समय मैं केंद्र की बीजेपी सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ महत्वपूर्ण बात कहना चाहता हूं. संसद सत्र में हमारे सांसद भाग लेंगे. अगर ऐसा कुछ भी किया जाता है जो तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाने वाला हो या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक शक्ति को असमान रूप से बढ़ाता है तो हम तमिलनाडु में चुप नहीं रहेंगे.’ उनकी यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है, जिसमें परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े अहम संशोधनों पर चर्चा प्रस्तावित है.
तमिलनाडु ठप हो जाएगा- स्टालिन की दो टूक
स्टालिन ने अपने संदेश में साफ कर दिया कि यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि गंभीर चेतावनी है. उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु पूरी ताकत से अपना विरोध दर्ज कराएगा. हर परिवार सड़कों पर उतरेगा. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में मेरे नेतृत्व में, हम एक बड़ा आंदोलन करेंगे.’ उन्होंने आगे कहा, ‘अगर तमिलनाडु को नुकसान पहुंचाने वाला कोई भी कदम उठाया गया या उत्तरी राज्यों की राजनीतिक ताकत को असमान रूप से बढ़ाया गया तो तमिलनाडु ठप हो जाएगा.’ यह बयान साफ तौर पर संकेत देता है कि DMK इस मुद्दे को सिर्फ राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे जन आंदोलन में बदलने की तैयारी में है.
गोपनीय तरीके से हो रहा परिसीमन- स्टालिन का आरोप
स्टालिन ने केंद्र सरकार पर परिसीमन प्रक्रिया को गोपनीय रखने और राज्यों से बिना सलाह लिए आगे बढ़ाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को गोपनीय रखा गया है और बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बिना किसी राजनीतिक दल या राज्य से परामर्श किए इसे एकतरफा आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है.’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद का विशेष सत्र चुनावों के बीच जबरन बुलाया जा रहा है ताकि संवैधानिक संशोधन को तेजी से पास कराया जा सके.
लोकतंत्र और राज्यों के अधिकारों पर हमला: एमके स्टालिन
सीएम एमके स्टालिन ने इस कदम को सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया. उन्होंने कहा, ‘यह जल्दबाजी में परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश बीजेपी सरकार की ओर से लोकतंत्र पर खुला हमला है. इससे भी ज्यादा यह राज्यों के अधिकारों पर सीधा हमला है. हमें यह भी नहीं पता कि यह प्रक्रिया कैसे लागू की जाएगी.’ उन्होंने याद दिलाया कि दक्षिणी राज्यों ने केंद्र की सलाह पर जनसंख्या नियंत्रण के उपाय अपनाए थे, लेकिन अब उसी के चलते उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम होने का खतरा है.
यह अंतिम चेतावनी है- मोदी सरकार को संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते उन्होंने सख्त लहजे में कहा, ‘अगर तमिलनाडु प्रभावित होता है, तो हम पूरे देश को इसका एहसास कराएंगे. पीएम मोदी मैं फिर दोहराता हूं कि यह तमिलनाडु की ओर से आपको दी गई अंतिम चेतावनी है. तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा. इसे धमकी मत समझिए, यह एक चेतावनी है. हमारे लिए सत्ता नहीं, सिद्धांत मायने रखते हैं. राज्यों के अधिकार मायने रखते हैं.’
पीएम की सफाई के बाद क्यों अहम है यह विवाद?
प्रस्तावित परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 850 तक हो सकती है. माना जा रहा है कि इससे जनसंख्या के आधार पर उत्तरी राज्यों को ज्यादा सीटें मिलेंगी, जबकि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है. यही वजह है कि तमिलनाडु समेत कई दक्षिणी राज्य इसे राजनीतिक असंतुलन का खतरा बता रहे हैं.
हालांकि पीएम मोदी ने अपनी केरल की रैली में कहा कि जनसंख्या को सफलतापूर्वक कंट्रोल करने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों में लोकसभा सीट की संख्या कम नहीं की जाएंगी और देश भर के राज्यों को लाभ पहुंचाने के लिए सीट की कुल संख्या बढ़ाई जाएगी. उन्होंने कहा कि ये झूठी अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि जनसंख्या नियंत्रण के कारण दक्षिण भारतीय राज्यों में सीट की संख्या कम कर दी जाएंगी, लेकिन यह पूरी तरह असत्य है.
पीएम मोदी ने साफ किया है कि इस विस्तार से सुनिश्चित होगा कि जनसंख्या नियंत्रण में मिली सफलता के बावजूद दक्षिण भारतीय राज्यों की सीट संख्या में कोई कमी नहीं होगी. संसद यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाएगी कि उनकी सीट पूरी तरह सुरक्षित रहें. प्रधानमंत्री ने कहा कि केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गोवा और तेलंगाना जैसे राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में अच्छा काम किया है. उनकी जनसंख्या वृद्धि कम रहने पर भी उनकी लोकसभा की कोई सीट कम नहीं की जानी चाहिए.
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