Assam Assembly Elections 2026: असम में चुनावी दंगल के बीच JMM और जय भारत पार्टी का गठबंधन, आदिवासी और चाय जनजाति के मुद्दों पर जोर

आगामी विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है. आदिवासी बहुल राज्य झारखंड की प्रमुख राजनीतिक पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम की क्षेत्रीय पार्टी जय भारत पार्टी (JBP) को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की है. इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य असम के आदिवासी और चाय जनजाति समुदायों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान करना है.
करीब दो साल पहले असम के विभिन्न आदिवासी संगठनों, समूहों और समुदायों के सहयोग से गठित जय भारत पार्टी को अब JMM का मजबूत साथ मिला है. दोनों दल मिलकर एक साझा मंच पर चुनाव लड़ रहे हैं और राजनीतिक शक्ति हासिल कर समुदायों के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों को हल करने की रणनीति बना रहे हैं. इस विधानसभा चुनाव में यह गठबंधन 18 सीटों पर संयुक्त उम्मीदवार उतार चुका है, जो असम की राजनीति में एक नई दिशा की ओर संकेत करता है.
पूर्व उग्रवादियों का समर्थन
इस राजनीतिक पहल को उन पूर्व आदिवासी उग्रवादी संगठनों के सदस्यों का भी खुला समर्थन मिला है, जो अब मुख्यधारा में लौट चुके हैं. विशेष रूप से साहिल मुंडा, जो पहले एक उग्रवादी संगठन के शीर्ष नेता रह चुके हैं, सरूपथार विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं. उनके नेतृत्व में कई पूर्व सदस्य इस बार जय भारत पार्टी और JMM के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
बढ़ता राजनीतिक प्रभाव
पार्टी के नेताओं के अनुसार, उनका चुनाव में उतरने का मुख्य उद्देश्य अपने समुदाय की वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान करना है. सहिल मुंडा ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और असम की लगभग 40 विधानसभा सीटों पर आदिवासी और चाय जनजाति समुदाय निर्णायक भूमिका निभाते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में यह गठबंधन इन सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगा और लोकसभा चुनाव में भी अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा. उनका मानना है कि आने वाले समय में जय भारत पार्टी और JMM असम की राजनीति में एक अहम शक्ति बनकर उभरेंगे.
जनजातीय अधिकारों पर जोर
गठबंधन ने स्पष्ट किया है कि उनका मुख्य लक्ष्य आदिवासी और चाय जनजाति समुदायों को वर्षों से झेल रहे शोषण और उपेक्षा से मुक्त कराना है. विशेष रूप से जनजातीय दर्जा (ST स्टेटस) दिलाने और अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान पर जोर दिया जा रहा है.
सहिल मुंडा ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले तीन वर्षों में आत्मसमर्पण कर चुके कई आदिवासी उग्रवादियों को सरकार की ओर से कोई पर्याप्त सहायता नहीं मिली है. उन्होंने कहा कि इनमें से कई लोग आज दिहाड़ी मजदूरी कर जीवनयापन करने को मजबूर हैं.
असम की राजनीति में नया समीकरण
जय भारत पार्टी और JMM का यह गठबंधन असम की राजनीति में एक नया समीकरण बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. आदिवासी और चाय जनजाति समुदाय, जो लंबे समय से सरकार गठन में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, अब एक संगठित राजनीतिक ताकत के रूप में उभर सकते हैं.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस गठबंधन की सक्रियता से आने वाले समय में असम की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसमें एक आदिवासी मुख्यमंत्री बनने की संभावनाओं के साथ आदिवासी नेतृत्व की भूमिका और मजबूत हो सकती है.
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