आजमगढ़

अमेरिका से टकराव के बीच ईरान की मजबूती, शांति के लिए आगे आया तेहरान; लेकिन रखीं तीन स्पष्ट शर्तें

मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि वह केवल सैन्य ताकत ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक समझ और आत्मसम्मान के साथ भी दुनिया के सामने खड़ा है। अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान ने मजबूती से जवाब दिया और अब शांति के लिए पहल भी की है।ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने स्पष्ट कहा है कि तेहरान क्षेत्रीय शांति का समर्थक है, लेकिन शांति किसी भी कीमत पर नहीं बल्कि सम्मान और न्याय के आधार पर होनी चाहिए।

ईरान की मजबूत शर्तें

1-राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने साफ शब्दों में कहा कि संघर्ष समाप्त करने के लिए तीन अहम शर्तें पूरी करनी होंगी:

2_ईरान के वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी जाए।

3-युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई यानी उचित मुआवजा दिया जाए।

भविष्य में ईरान पर किसी भी हमले को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।इन शर्तों के साथ ईरान ने यह संदेश दिया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और अधिकारों से समझौता नहीं करेगा।

युद्ध में भी दिखाई मजबूती

अमेरिका और उसके सहयोगी Israel द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए हमलों के बाद भी ईरान ने अपने बचाव और जवाबी कार्रवाई में उल्लेखनीय क्षमता दिखाई है। रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों पर जवाबी हमलों ने यह साबित किया कि ईरान की सैन्य शक्ति और रणनीतिक क्षमता को कम आंकना आसान नहीं है।ईरान की प्रतिक्रिया ने यह भी दिखाया कि वह केवल क्षेत्रीय ताकत ही नहीं, बल्कि एक संगठित और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली वाला देश है।

वैश्विक स्तर पर सक्रिय कूटनीति

राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने बताया कि उन्होंने इस संकट को लेकर Vladimir Putin और पाकिस्तान के नेताओं से भी बातचीत की है। यह कदम दिखाता है कि ईरान केवल युद्ध नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए स्थायी शांति का रास्ता तलाश रहा है।

अमेरिका का भारी खर्च

दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा मुख्यालय United States Department of Defense के शुरुआती अनुमान के अनुसार युद्ध के पहले छह दिनों में ही अमेरिकी टैक्सपेयर्स के करीब 11.3 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। इससे यह भी साफ होता है कि संघर्ष का आर्थिक बोझ अमेरिका पर भी भारी पड़ रहा है।

जीत के दावे और हकीकत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump भले ही रैलियों में जीत का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीनी स्थिति यह दिखाती है कि ईरान ने दबाव में झुकने के बजाय मजबूती से अपनी स्थिति बनाए रखी है।

ईरान की ताकत का संदेश

इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि ईरान एक ऐसा देश है जो संकट के समय भी साहस, रणनीति और आत्मसम्मान के साथ खड़ा रहता है। शांति की पहल करते हुए भी उसने यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी संप्रभुता और राष्ट्रीय अधिकार सर्वोपरि हैं।

AZMI DESK

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