स्वास्थ्य

इमरजेंसी में ChatGPT कितना सुरक्षित? रिसर्च ने जताई चिंता, जानें AI की सीमाएं

शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों की मदद से 60 अलग-अलग मेडिकल केस तैयार किए. इनमें दिल की बीमारी, सांस की दिक्कत, मानसिक स्वास्थ्य संकट और मेटाबॉलिक रोग जैसी 21 तरह की बीमारियां शामिल थीं. हर केस को 16 अलग-अलग परिस्थितियों में जांचा गया. कुल मिलाकर AI से 960 जवाब लिए गए. मकसद यह देखना था कि क्या ChatGPT सही तरीके से बता सकता है कि मरीज को तुरंत इमरजेंसी में जाना चाहिए या कुछ समय बाद डॉक्टर को दिखाना ठीक रहेगा.

शोधकर्ताओं ने डॉक्टरों की मदद से 60 अलग-अलग मेडिकल केस तैयार किए. इनमें दिल की बीमारी, सांस की दिक्कत, मानसिक स्वास्थ्य संकट और मेटाबॉलिक रोग जैसी 21 तरह की बीमारियां शामिल थीं. हर केस को 16 अलग-अलग परिस्थितियों में जांचा गया. कुल मिलाकर AI से 960 जवाब लिए गए. मकसद यह देखना था कि क्या ChatGPT सही तरीके से बता सकता है कि मरीज को तुरंत इमरजेंसी में जाना चाहिए या कुछ समय बाद डॉक्टर को दिखाना ठीक रहेगा.

रिसर्च में पता चला कि AI ने आधे से ज्यादा गंभीर इमरजेंसी मामलों को कम खतरनाक बताया. करीब 52 प्रतिशत मामलों में जहां तुरंत अस्पताल जाना जरूरी था, वहां AI ने कम जरूरी इलाज की सलाह दी. डायबिटीज की जानलेवा स्थिति (कीटोएसिडोसिस), सांस रुकने का खतरा और अन्य गंभीर आपात स्थितियां. ऐसे मामलों में देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.

रिसर्च में पता चला कि AI ने आधे से ज्यादा गंभीर इमरजेंसी मामलों को कम खतरनाक बताया. करीब 52 प्रतिशत मामलों में जहां तुरंत अस्पताल जाना जरूरी था, वहां AI ने कम जरूरी इलाज की सलाह दी. डायबिटीज की जानलेवा स्थिति (कीटोएसिडोसिस), सांस रुकने का खतरा और अन्य गंभीर आपात स्थितियां. ऐसे मामलों में देरी मरीज के लिए जानलेवा हो सकती है.

Published at : 28 Feb 2026 07:04 AM (IST)

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AZMI DESK

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