दिल्ली: ITO में पहला ग्रीन वेस्ट प्लांट शुरू, कचरे से बनेगी खाद और बायो-फ्यूल

राजधानी दिल्ली को प्रदूषण और कचरे की समस्या से निजात दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है. दिल्ली में आईटीओ (ITO) के पास पहला ‘ग्रीन वेस्ट प्लांट’ (Green Waste Plant) शुरू कर दिया गया है. इस प्लांट में पेड़-पौधों की सूखी टहनियों, पत्तियों और बागवानी से निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल दिल्ली की सफाई व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि वायु प्रदूषण को कम करने में भी काफी मदद मिलेगी.
दिल्ली के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस प्लांट की शुरुआत करते हुए कहा कि सरकार दिल्लीवासियों से किए गए ‘विकसित दिल्ली’ के वादे को पूरा करने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि आईटीओ के पास शुरू हुआ यह प्लांट इसी दिशा में एक अहम कदम है. इसके साथ ही, PWD द्वारा तैयार किए गए कुल 6 ग्रीन वेस्ट प्लांट अब बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं.
कचरा नहीं, अब बनेगा ‘संसाधन’
मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि अब तक पेड़ों और बागवानी से निकलने वाला कचरा या तो खुले में पड़ा रहता था या कई जगहों पर उसे जला दिया जाता था, जिससे धुआं और प्रदूषण बढ़ता था. विशेषकर सर्दियों के मौसम में यह कचरा जलने से हवा और ज्यादा खराब हो जाती थी. लेकिन अब इस नए ग्रीन वेस्ट प्लांट में मशीनों के जरिए इस कचरे को प्रोसेस करके खाद, बायो-फ्यूल और अन्य उपयोगी चीजों में बदला जाएगा. इससे कचरा एक समस्या की बजाय संसाधन बन जाएगा.
कचरे के पहाड़ों से मिलेगी मुक्ति!
दिल्ली लंबे समय से कचरे की भारी समस्या और गाजीपुर, भलस्वा व ओखला जैसे इलाकों में बने कूड़े के विशाल पहाड़ों से जूझ रही है. इसे देखते हुए सरकार अब कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर (Waste Segregation) उसका वैज्ञानिक निपटान करने पर जोर दे रही है. ग्रीन वेस्ट प्लांट स्थापित करना इसी व्यापक योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
स्वच्छ और हरित दिल्ली की ओर कदम
मंत्री प्रवेश वर्मा ने इसे सिर्फ एक शुरुआत बताते हुए कहा कि आने वाले समय में पूरी दिल्ली में ऐसे और भी प्लांट लगाए जाएंगे. सरकार का लक्ष्य दिल्ली को स्वच्छता और हरित विकास (Green Development) की एक मिसाल बनाना है. इस पहल से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है.



