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बिहार के शिक्षण संस्थानों में मांस बिक्री पर रोक, AIMIM बोली- 90% हिंदू खाते हैं, होली पर तो…

 बिहार सरकार ने शिक्षण संस्थानों और धार्मिक स्थलों के पास मीट मछली की दुकानों पर बैन लगाने का फैसला किया  है. अब इस पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष शोएब जमी ने प्रतिक्रिया दी है. 

उन्होंने कहा कि ‘यह मुख्य रूप से हाइजीन का मामला है. लेकिन अगर कोई मछली और मीट पर एतराज़ करता है, तो मैं यह बताना चाहूंगा कि देश में लगभग 90% हिंदू मछली और मीट खाते हैं.’

उन्होंने कहा कि यह तो एजेंडा है. प्रोटीन कैसे मिलेगा बच्चों को? आप अमेरिका में देखिए, दुनिया भर के तमाम विश्वविद्यालयों में बच्चों को जो भोजन दिए जाते हैं, अंडे दिए जाते हैं. कौन कहता है कि गंदगी करते हैं. उसके लिए कानून बनाइए. यह मामला हाईजीन का है. हाईजीन के लिए तो हम भारतीय वैसे ही बदनाम है. अगर कोई इसको मांस मछली तक लेकर जाएगा जो देश के 90 फीसदी हिन्दू भाई , मांस, मछली अंडा खाते हैं. होली में आप क्यों नहीं बोलते हैं जो लंबी लंबी लाइन लगती है. खुद के इनके बच्चे जो अमेरिका में पढ़ते हैं, वो क्या खाते हैं. पूछिए इनसे.

क्या बोली JDU?

उधर, इस मामले पर जनता दल यूनाइटेड के नेता और प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, मछली और मांस बेचने वाली दुकानें मंदिरों या मस्जिदों जैसे धार्मिक स्थलों के पास पहले से नहीं हैं. अब स्कूलों और कॉलेजों के पास भी मांस-मछली नहीं बिकेगी. यह सरकार की मौजूदा नीति है, कोई नया फैसला नहीं है, इस पर विवाद का कोई कारण नहीं है. हम मछली क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

वहीं अखिल भारतीय इमाम संघ के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने कहा कि बिल्कुल यह अच्छी बात है कि धार्मिक स्थल और शिक्षण संस्थानों के आसपास मीट-मछली की दुकानें नहीं होनी चाहिए, लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि संविधान में खाने के अधिकार का भी प्रावधान है, जिसके तहत उसे कुछ भी खाने का अधिकार है.

AZMI DESK

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