एडिशनल पुलिस कमिश्नर के साथ फोटो की ‘सच्चाई’ आई सामने, जानें आशुतोष ब्रह्मचारी ने क्या कहा?

आशुतोष ने कहा कि वे मानते हैं कि अजय पाल शर्मा ने अपराध नियंत्रण को लेकर अच्छे काम किए हैं और कई एनकाउंटर किए हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से उनके साथ उनके किसी प्रकार के संबंध नहीं हैं. उन्होंने कहा कि सपा सरकार के दौरान उसी अधिकारी ने उन्हें जेल भेजा था, ऐसे में करीबी संबंध होने का सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने यह भी कहा कि जिस मुकदमे में उन्हें जेल भेजा गया था, उसमें हाईकोर्ट ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है. वायरल तस्वीर को उन्होंने एआई से बनाई गई फर्जी और एडिटेड फोटो बताया और कहा कि उनका उस तस्वीर या अधिकारी से कोई लेना-देना नहीं है.
समझिये पूरी टाइमलाइन
इसके बाद 13 फरवरी 2026 को दोनों नाबालिगों के बयान धारा 164 के तहत दर्ज हुए. 21 फरवरी 2026 को पॉक्सो कोर्ट ने केस दर्ज करने का आदेश दिया, जिसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मुकंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. FIR में आरोप लगाया गया कि गुरुकुल में सेवा और शिक्षा के नाम पर दो नाबालिगों के साथ कुकर्म किया गया और महाकुंभ-2025 तथा माघ मेला-2026 के दौरान भी यौन उत्पीड़न हुआ.
क्या था माघ मेला विवाद?
इससे पहले माघ मेला-2026 के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन संगम घाट के पास पुलिस ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोकी थी. पुलिस का कहना था कि समर्थकों और शिष्यों ने बैरिकेड तोड़े, जबकि स्वामी ने आरोप लगाया कि उनके बटुकों की शिखा खींची गई और बदसलूकी की गई. 18-19 जनवरी को उन्होंने धरना शुरू किया और माफी व सम्मानजनक व्यवस्था की मांग की.
प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने जारी किया था नोटिस
इसके बाद 19 जनवरी को प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने ‘शंकराचार्य’ पदनाम पर नोटिस जारी किया. 21 जनवरी को स्वामी ने आठ पन्नों में जवाब दिया. 22 जनवरी को दूसरा नोटिस जारी कर जमीन आवंटन रद्द करने पर जवाब मांगा गया. 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर उन्होंने स्नान नहीं किया. 24 जनवरी को उनके शिविर के बाहर हंगामा हुआ और FIR दर्ज हुई.
फिर शुरू हुआ इस्तीफों का दौर
इसके बाद 26 जनवरी 2026 को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने इस्तीफा दिया, जबकि 24 घंटे के भीतर अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में इस्तीफा दिया. 28 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला छोड़ दिया.
सीएम योगी और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच हुई बयानबाजी
13 फरवरी को उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति ‘शंकराचार्य’ नहीं लिख सकता. इसके जवाब में 23 जनवरी को स्वामी ने गो हत्या के मुद्दे पर टिप्पणी की, 26 जनवरी को कहा कि संविधान की अवमानना सत्ता में बैठे लोग कर रहे हैं और 14 फरवरी को कहा कि कौन शंकराचार्य है यह वे तय नहीं कर सकते.
आशुतोष ब्रह्मचारी का क्या है असली नाम?
बता दें आशुतोष ब्रह्मचारी का वास्तविक नाम आशुतोष पाण्डेय है. वे स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य हैं और 2022 में दीक्षा ली. मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस में पक्षकार हैं और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष बताए जाते हैं. कांधला के प्राचीन शाकंभरी सिद्ध पीठ के प्रबंधक हैं.
रिश्वत देने के आरोप में जेल जा चुके हैं आशुतोष ब्रह्मचारी
आशुतोष ब्रह्मचारी पर 27 आपराधिक मामले दर्ज बताए जाते हैं. शामली के थाना कांधला में हिस्ट्रीशीट में नाम दर्ज है. 25 हजार के इनामी रह चुके हैं और छह महीने जिला बदर रहे हैं. रिश्वत देने के आरोप में जेल जा चुके हैं. गोंडा के तत्कालीन SP नवनीत राणा द्वारा जेल भेजे जाने का उल्लेख है. गो-तस्कर माजिद के साथ रिश्वत प्रकरण, विधवा महिला से गैंगरेप का आरोप, भाई विनीत और शुभम के साथ कथित अपराध, मकान कब्जा, उम्र गलत बताकर चुनाव लड़ना, ठगी और विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज होने के मामले भी दर्ज बताए जाते हैं.



