दिल्ली: कभी CAA, कभी फीस…, बीते कुछ सालों में कब-कब विवादों घिरा JNU?

भारत के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शामिल दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है, लेकिन विवादों से इसका रिश्ता भी अक्सर सुर्खियों में बना रहता है. हाल ही में हुए कई ऐसे मामले हैं जिसमें इस विश्वविद्यालय ने रातों रात रणभूमि का रूप ले लिया हो.
ताजा मामला बीते दिन 22 फरवरी की है जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में 22 फरवरी देर स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई जब एक विरोध मार्च के दौरान वामपंथी और दक्षिणपंथी रुझान वाले छात्र समूहों के बीच हिंसा हुई.
दोनों समूहों ने हिंसा के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है। छात्रों के अनुसार, कथित घटना रविवार देर रात करीब डेढ बजे हुई जिसमें छात्रों के बीच झड़प होने के बाद कथित पथराव में कई छात्र घायल हो गए. लेकिन ये पहली बार नहीं है कि JNU में ऐसा कुछ हुआ हो. आइए देखें साल 2020 से अब तक कब कब क्या क्या हुआ.
साल 2020 में CAA के विरोध पर हुआ था बवाल!
जनवरी 2020 में 5 जनवरी की रात नकाबपोश हमलावरों ने कैंपस में घुसकर छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था जिसमें करीब 40 लोग घायल हुए थे. बता दें कि यह हमला तब हुआ था जब शिक्षकों का समूह कैंपस की फीस बढ़ाने पर चर्चा कर रहा था. यही वजह रही कि इस घटना को कैंपस फीस हाइक और उन दिनों जारी CAA के विरोध से जोड़कर देखा गया. वहीं अलग-अलग छात्र संगठनों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे.
जनवरी 2024 में चुनाव कमिटी चयन को लेकर हुई झड़प में चार से अधिक छात्र घायल हुए और 2024 की हिंसा के मामले में ABVP के 8 सदस्यों पर ₹19,000 प्रत्येक का जुर्माना लगाया गया, जिस पर संगठन ने प्रशासन और छात्र संघ के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया.
2025 में बॉयोमीट्रिक प्रणाली पर हुआ विवाद!
साल 2025 में भी कई विवाद सामने आए जिनमें दशहरा आयोजन को लेकर टकराव, सिद्धांत नॉलेज फाउंडेशन के साथ MoU और बॉयोमीट्रिक प्रणाली के विरोध में प्रदर्शन तथा लाइब्रेरी में तोड़फोड़ के बाद 5 छात्र नेताओं का रस्टिकेशन शामिल है.
नवंबर 2025 के छात्र संघ चुनाव में लेफ्ट फ्रंट ने प्रमुख पदों पर जीत दर्ज की, जबकि जनवरी 2026 में 2020 हमले की बरसी पर कार्यक्रम और विवादित नारों के बाद प्रशासन ने पुलिस में शिकायत की. JNU में अधिकांश घटनाएं लेफ्ट और राइट छात्र संगठनों के वैचारिक संघर्ष और प्रशासनिक फैसलों से जुड़ी रही हैं, जहां जांच और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बावजूद टकराव की घटनाएं रुक नहीं पाई हैं.
बता दें कि इन विवादों में छात्र संगठन ABVP, JNSU, AISA, SFI इनका नाम शामिल होता है. इन्हीं संगठनों के बीच आरोप प्रत्यारोप के मामलों में विवाद शुरू भी होते हैं और समय अनुसार धुंधले भी हो जाते हैं. लेकिन सवाल ये उठता है कि इतने बड़े संस्थानों में क्या कोई कानून व्यवस्था लागू नहीं हो सकती.. क्या विश्वविद्यालय का टैग लिए JNU जैसी संस्था में पढ़ने वाले छात्रों की प्राथमिकता शोध, अध्ययन और बौद्धिक विमर्श नहीं होनी चाहिए. लगातार सामने आ रही घटनाएं यह संकेत देती हैं कि छात्र संगठनों के बीच संवाद, जवाबदेही और प्रशासनिक सख्ती की स्पष्ट रूपरेखा तय किए बिना ऐसे विवाद थमने वाले नहीं हैं.



