‘फिर कब्र से बाहर आया टीपू सुल्तान…’, सामना में संजय राउत ने BJP-कांग्रेस पर साधा निशाना

महाराष्ट्र की राजनीतिक हवाएं इस समय टीपू सुल्तान के इर्द-गिर्द घूम रही हैं. शिवसेना UBT के मुखपत्र ‘सामना’ ने टीपू सुल्तान को लेकर छिड़े विवाद पर बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस पर भी निशाना साधा है. मामला मालेगांव महानगरपालिका के डिप्टी मेयर कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाने से शुरू हुआ, जिसके बाद बयानबाजी तेज हो गई. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर के विवाद को और गरमाया दिया है.
संपादकीय में लिखा गया कि औरंगजेब और अफजल खान की तरह मैसूर के टीपू सुल्तान को फिर से कब्र से बाहर निकाला जा रहा है. मालेगांव के ‘शान-ए-हिंद’ हॉल में तस्वीर लगाए जाने पर विवाद खड़ा हुआ, हालांकि बाद में तस्वीर हटा दी गई. इसके बावजूद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे.
सामना ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इस मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग दिया. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल के उस बयान की भी आलोचना की गई, जिसमें उन्होंने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से की थी. संपादकीय में कहा गया कि यह तुलना असंगत और अनुचित है.
बीजेपी और कांग्रेस पर सवाल
संपादकीय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा गया, “उन्होंने कांग्रेस की कड़ी आलोचना की. साथ ही सामना ने सवाल उठाया कि अगर टीपू को लेकर इतना आक्रोश है तो पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच पर चुप्पी क्यों है. लेख में बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि यह सच है कि भाजपा के लोग टीपू सुल्तान के नाम से अपनी सहूलियत के अनुसार खुश या नाराज होते हैं.”
“इसी टीपू सुल्तान को पाकिस्तान में ‘नायक’ माना जाता है और उसी पाकिस्तान के साथ भारत क्रिकेट मैच खेल रहा है, लेकिन आश्चर्य की बात है कि फडणवीस व बीजेपी को यह निंदनीय नहीं लगता. भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के सूत्रधार गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह हैं. इसलिए अगर टीपू के प्रति गुस्सा वास्तविक है तो बीजेपी, फडणवीस और अन्य लोगों को भारत-पाकिस्तान मैच और इसे आयोजित करने वाले जय शाह की कड़ी निंदा करनी चाहिए.” BJP की मंशा पर सवाल उठाते हुए माउथपीस ने पूछा कि इंडिया-पाकिस्तान क्रिकेट के खिलाफ कोई प्रोटेस्ट क्यों नहीं देखा जाता और ऐसे मौकों पर BJP का खून क्यों नहीं खौलता.
पुणे में हर्षवर्धन सपकाल के खिलाफ टीपू की प्रशंसा करने के लिए मामला दर्ज किया गया, लेकिन टीपू को नायक मानने वाले पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने की प्रेरणा देने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती.
इतिहास बनाम वर्तमान राजनीति
संपादकीय में टीपू सुल्तान के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा गया, “टीपू सुल्तान कौन था, वह क्या था? इस इतिहास पर चर्चा करने का कोई फायदा नहीं. वह मैसूर का राजा था. उसके पिता हैदर अली भी राजा थे. उसने अंग्रेजों से युद्ध किया. वह एक योद्धा था, लेकिन वह अपने राज्य और साम्राज्य को बचाने के लिए युद्ध लड़ रहा था. छत्रपति शिवाजी महाराज ऐसे नहीं थे. छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगल आक्रमण को रोकने के लिए हिंदवी स्वराज की शून्य से स्थापना की. उन्होंने अपना राज बनाया. टीपू को यह राज्य विरासत में मिला. छत्रपति ने स्वराज के शत्रुओं को इसी मिट्टी में दफना दिया. 4 मई 1799 को श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में उनकी मृत्यु हुई. कुछ इतिहासकार उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाला पहला स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं.”
हालांकि लेख में यह भी कहा गया कि टीपू पर हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन और अत्याचार के आरोप लगते रहे हैं, जिससे विवाद भड़कता है. साथ ही छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज की स्थापना को अद्वितीय बताते हुए कहा गया कि उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती.
एडिटोरियल में बताया गया कि कैसे BJP के कुछ नेता मुंबई की कई सड़कों का नाम टीपू सुल्तान के नाम पर रखने की बात कर रहे हैं और टीपू सुल्तान अब इतिहास का हिस्सा हैं और भाजपा को जवाब देना चाहिए कि वे वर्तमान में क्या कर रहे हैं.



