चंद्रपुर में ‘ईश्वर-चिट्ठी’ से तय हुआ डिप्टी मेयर, महापौर पद पर बड़ा खेला, पर्ची निकलते ही सब हैरान

चंद्रपुर महानगरपालिका में उपमहापौर पद का चुनाव मंगलवार (10 फरवरी) को जबरदस्त राजनीतिक ड्रामे में बदल गया. कांग्रेस समर्थित जनविकास सेना के उम्मीदवार पप्पू देशमुख और भाजपा समर्थित शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के उम्मीदवार प्रशांत दानव को मतदान में बराबर 32–32 वोट मिले. दोनों उम्मीदवारों को समान मत मिलने से चुनाव अटक गया और सदन में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
पहले से जताई जा रही थी बराबरी की आशंका
उपमहापौर चुनाव से पहले ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि एमआईएम का एक नगरसेवक कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार पप्पू देशमुख को समर्थन दे सकता है. यदि ऐसा हुआ, तो वोट बराबर होने की स्थिति बन सकती है. मतदान के नतीजों ने इन अटकलों को सही साबित कर दिया. दोनों पक्षों को 32–32 वोट मिलने से फैसला नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया गया.
नियमों के मुताबिक, यदि उपमहापौर चुनाव में वोट बराबर हों, तो ईश्वर-चिट्ठी के जरिए निर्णय लिया जाता है. इसी प्रक्रिया के तहत जिलाधिकारी और पीठासीन अधिकारी की मौजूदगी में चिट्ठी निकाली गई.
चिट्ठी में उद्धव ठाकरे गुट के उम्मीदवार प्रशांत दानव का नाम निकलते ही वे चंद्रपुर महानगरपालिका के नए उपमहापौर घोषित कर दिए गए. इस फैसले के बाद ठाकरे गुट के समर्थकों में उत्साह देखा गया, जबकि विपक्षी खेमे में मायूसी छा गई.
महापौर चुनाव में भी कांटे की टक्कर
उपमहापौर के साथ-साथ महापौर पद का चुनाव भी बेहद रोमांचक रहा. महापौर पद पर भाजपा की संगीता खांडेकर ने मात्र एक वोट के अंतर से जीत दर्ज की. उन्हें 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को 31 वोटों से संतोष करना पड़ा.
वंचित बहुजन आघाड़ी के दो नगरसेवकों की अनुपस्थिति के कारण बहुमत का आंकड़ा 33 पर आ गया था. इस स्थिति में एमआईएम की तटस्थ भूमिका ने नतीजों को और दिलचस्प बना दिया.
सत्ता-स्थापना में ठाकरे गुट की अहम भूमिका
इस पूरे सत्ता-नाटक में उद्धव ठाकरे गुट की भूमिका निर्णायक साबित हुई. शुरुआत में भाजपा के पास 24 नगरसेवकों का संख्याबल था, जिसमें भाजपा के 23 और शिंदे गुट की शिवसेना का 1 नगरसेवक शामिल था. इसके बाद ठाकरे गुट के जिलाध्यक्ष संदीप गिर्हे के नेतृत्व में 6 नगरसेवक और 2 अपक्ष नगरसेवक भाजपा के साथ आ गए. इससे भाजपा का संख्याबल बढ़कर 32 तक पहुंच गया और महापौर पद पर जीत का रास्ता साफ हो गया.
एक ओर महापौर पद का फैसला सिर्फ एक वोट से हुआ, तो दूसरी ओर उपमहापौर पद का निर्णय ईश्वर-चिट्ठी से हुआ. इन दोनों नाटकीय घटनाओं ने चंद्रपुर के सत्ता-संघर्ष को पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है.
आम लोगों से लेकर राजनीतिक विश्लेषकों तक, सभी इस चुनावी रोमांच पर नजर बनाए हुए हैं. चंद्रपुर महानगरपालिका में सत्ता की यह कहानी आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति की दिशा तय करती नजर आ रही है.



