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राजस्थान में गरमाई सियासत, नगर निकाय और पंचायत चुनाव में EWS को 10 फीसदी आरक्षण की मांग

राजस्थान में वर्ष 2026 में होने वाले पंचायती राज एवं नगर निकाय चुनावों से पहले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को लेकर एक अहम राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है. ईडब्ल्यूएस संघ समिति जोधपुर के बेनर तले आज भारी तदाद में समर्थन में पहुंचकर ज्ञापन दिया.

राज्य सरकार से मांग की जा रही है कि जिस तरह शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी नौकरियों में EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, उसी तर्ज पर स्थानीय निकाय चुनावों में भी उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिया जाए. 

ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण की उठी मांग

राजस्थान सरकार द्वारा सदैव सामाजिक न्याय, समान अवसर एवं समावेशी विकास की भावना को प्राथमिकता दी जाती रही है. भारत सरकार द्वारा संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को शैक्षणिक संस्थानों एवं सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसे राज्य सरकार द्वारा प्रभावी रूप से लागू किया जा चुका है.

वर्ष 2026 में प्रस्तावित नगर निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के परिप्रेक्ष्य में यह अत्यंत आवश्यक प्रतीत होता है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए.

संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक सिद्धांत

भारत के संविधान के अनुच्छेद 243D के अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग को उनकी जनसंख्या के अनुपात में पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान किया गया है. इसी प्रकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी, संतुलित एवं न्यायसंगत बनाने हेतु आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाना संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगा.

विधिक आधार

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 में आवश्यक संशोधन कर जिला परिषद, पंचायत समिति एवं ग्राम पंचायत स्तर पर निर्वाचित पदों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का विधिक प्रावधान किया जाना पूर्णतः संभव है. इसी प्रकार नगर निकाय अधिनियमों में भी आवश्यक संशोधन किया जा सकता है.

सामाजिक एवं आर्थिक वास्तविकताएं

राज्य के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में सामान्य वर्ग के अनेक परिवार अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति में जीवनयापन कर रहे हैं. राजनीतिक आरक्षण के माध्यम से ऐसे परिवारों के युवाओं को नेतृत्व का अवसर प्राप्त होगा तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी.

समावेशी विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

पंचायत एवं नगर निकाय स्तर पर EWS वर्ग को प्रतिनिधित्व प्रदान किए जाने से सामाजिक संतुलन स्थापित होगा, समान अवसरों को बढ़ावा मिलेगा तथा न्याय आधारित शासन व्यवस्था को मजबूती प्राप्त होगी.

राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप पहल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा गरीब, किसान, महिला एवं युवाओं के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. ऐसे में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े नागरिकों को राजनीतिक रूप से सशक्त किए बिना “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” की संकल्पना को पूर्ण रूप से साकार करना संभव नहीं होगा.

बजट सत्र अथवा विशेष अधिसूचना के माध्यम से राजस्थान की पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकायों के आगामी चुनावों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किए जाने का निर्णय लेकर प्रदेश के लाखों जरूरतमंद परिवारों को लाभान्वित करने की कृपा करें.

ईडब्ल्यूएस संघर्ष समिति संयोजक का क्या कहना है?

ईडब्ल्यूएस संघर्ष समिति संयोजक हनुमान सिंह खागटा का कहना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो यह स्थानीय राजनीति की तस्वीर बदल सकता है. इससे सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े युवाओं को नेतृत्व का अवसर मिलेगा और पंचायतों में सामाजिक संतुलन मजबूत होगा.

एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता का कहना है कि अब तक राजनीतिक आरक्षण का लाभ कुछ वर्गों तक सीमित रहा है. आर्थिक आधार पर प्रतिनिधित्व देने से लोकतंत्र और अधिक समावेशी बनेगा. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार बजट सत्र या किसी विशेष अधिसूचना के माध्यम से इस मांग पर कोई बड़ा फैसला लेती है या नहीं. यदि ऐसा होता है, तो यह राजस्थान की स्थानीय राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है.

AZMI DESK

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