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NCP के विलय के मुद्दे पर अब जितेंद्र आव्हाड बोले, ‘मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि…’

शरद पवार गुट के वरिष्ठ नेता जितेंद्र आव्हाड ने सोमवार (02 जनवरी) को दावा किया है कि एनसीपी (NCP) के दोनों गुटों का विलय दो हजार फीसदी तय था. उन्होंने कहा कि शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी का विलय अंतिम चरण में था.

विधायक जितेंद्र आव्हाड ने दिवंगत नेता अजित पवार को पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए ठाणे स्थित एनसीपी कार्यालय का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह 2000 प्रतिशत सच है कि दोनों एनसीपी का विलय होने जा रहा था. हालांकि ऐसे उच्च स्तरीय मामले नेतृत्व के विचार-विमर्श के लिए होते हैं, लेकिन मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह विलय अनिवार्य रूप से होना ही था.”

प्रशासन पर इतनी मजबूत पकड़ रखने वाला कोई नेता नहीं देखा- आव्हाड

जितेंद्र आव्हाड ने पत्रकारों से बातचीत में अजित पवार की प्रशासनिक कुशलता की प्रशंसा करते हुए विमान दुर्घटना में उनके निधन को महाराष्ट्र के शासन के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया. आव्हाड ने कहा कि उन्होंने 40 वर्षों में प्रशासन पर इतनी मजबूत पकड़ रखने वाला कोई नेता नहीं देखा. आव्हाड ने दिवंगत अजित पवार की तुरंत फैसला लेने की क्षमता की तारीफ करते हुए कहा कि अजित पवार के कार्यकाल में मंत्रालय में कोई भी फाइल कभी अटकी नहीं रही.

शरद पवार ने क्या कहा?

पिछले हफ्ते शरद पवार के इस दावे के बाद दोनों गुटों के विलय की अटकलों को बल मिला कि उनके दिवंगत भतीजे अजित पवार की इच्छा दोनों गुटों को एकजुट करने की थी और उन्होंने विलय के लिए 12 फरवरी की समयसीमा भी दी थी. उन्होंने कहा, “अब हमें लगता है कि उनकी इच्छा पूरी होनी चाहिए. अजित पवार, शशिकांत शिंदे और जयंत पाटिल ने दोनों गुटों के विलय की बातचीत शुरू की थी. विलय की तारीख भी तय हो गई थी. यह 12 फरवरी को निर्धारित थी. दुर्भाग्य से, अजित इससे पहले ही हमें छोड़कर चले गए.” 

देवेंद्र फडणवीस ने शरद पवार के दावे को किया खारिज

वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शरद पवार के दावे को लगभग खारिज करते हुए कहा कि अगर विलय की बातचीत वास्तव में चल रही होती, तो अजित पवार ने उन्हें इसकी जानकारी दी होती. हालांकि, एनसीपी नेताओं ने संकेत दिया है कि इस तरह के विलय की संभावना बहुत कम है, जिससे राजनीतिक दांव-पेच और भी गहरे हो गए हैं.

AZMI DESK

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