शोपियां: 4 फीट बर्फ में 15 KM चले ग्रामीण, PHE की लापरवाही से पाइपलाइन की मरम्मत में हुई देरी

दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले से सामुदायिक एकजुटता और प्रशासनिक लापरवाही की एक हैरान करने वाली तस्वीर सामने आई है. शादाब करेवा के सैकड़ों निवासियों ने कड़ाके की ठंड और 4 फीट गहरी बर्फ के बीच 15 किलोमीटर का पैदल सफर तय किया ताकि अपने गांव की प्यास बुझा सकें.
हाल ही में हुई भारी बर्फबारी के कारण दुबजन से मितवानी तक जाने वाली मुख्य पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई थी. इस वजह से शादाब करेवा और आसपास के इलाके पिछले एक हफ्ते से पीने के पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे थे. जब प्रशासन की ओर से कोई तुरंत राहत नहीं मिली, तो ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभालने का फैसला किया.
जान जोखिम में डालकर बनाया रास्ता
सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कुदाल और फावड़े लेकर निकले और जम देने वाली ठंड में बर्फ को काटकर रास्ता बनाया. स्थानीय निवासियों का कहना है कि वे घंटों पैदल चलकर दुबजन के उस दुर्गम क्षेत्र तक पहुंचे जहां पाइपलाइन टूटी थी. उनका उद्देश्य साफ था—प्रशासन की मदद करना ताकि पानी की सप्लाई जल्द बहाल हो सके.
बिना औजारों के पहुंचे विभाग के कर्मचारी
ग्रामीणों का आरोप है कि उनका उत्साह तब निराशा में बदल गया जब उन्होंने देखा कि साथ आए पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) विभाग के कर्मचारियों के पास मरम्मत के लिए बुनियादी सामान तक नहीं था.
स्थानीय निवासी ने कहा, “हम अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पहुंचे, रास्ता साफ किया, लेकिन विभाग के पास न जॉइंट थे, न आयरन कटर और न ही कोई और औजार. यह बेहद निराशाजनक है.” ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग तैयार होकर आता, तो मरम्मत उसी दिन पूरी हो जाती.
‘इलाका बहुत कठिन था’
इन आरोपों के बीच, PHE शोपियां के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अब्दुल राशिद ने अपनी चुनौती साझा की. उन्होंने बताया कि क्षतिग्रस्त स्थल मुख्य सड़क से 15 किमी दूर है और वहां पहुंचना बहुत मुश्किल था. भारी बर्फबारी के कारण विभाग के कर्मचारियों के लिए अकेले जाना संभव नहीं था, इसलिए ग्रामीणों का सहयोग लिया गया. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में इसी इलाके में बर्फ में फंसे कुछ कर्मचारियों को रेस्क्यू भी किया गया था.
क्या है ताजा स्थिति
प्रशासन का दावा है कि स्थानीय लोगों के सहयोग से अब सेडो और शादाब करेवा दोनों इलाकों में पानी की सप्लाई आंशिक रूप से बहाल कर दी गई है. हालांकि, ग्रामीण अब भी पूरी तरह से सुचारू सप्लाई का इंतजार कर रहे हैं.



