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‘हमें तो तेरा एतबार था ही नहीं’, बजट पर इमरान प्रतापगढ़ी ने शायराना अंदाज में कसा तंज

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने बजट को लेकर सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकार से ही कोई उम्मीद नहीं है तो बजट से क्या उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने शायरी के जरिए अपनी बात रखते हुए कहा, “गिला करें वो जिनको तुमसे कुछ उम्मीदें थीं, हमें तो खैर तेरा एतबार था ही नहीं.” 

प्रतापगढ़ी ने कहा कि देश ने ग्यारह बार बजट देख लिया है और हर बार यही साबित हुआ कि आम आदमी के लिए इसमें कुछ नहीं होता. उनके मुताबिक बजट हमेशा उद्योगपतियों के हित में आता है, जनता, किसान और गरीब वर्ग को इसमें केवल वादे ही मिलते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि फिर भी लोग देखेंगे कि वित्त मंत्री के पिटारे से इस बार क्या निकलता है, लेकिन उम्मीद बहुत कम है.

सरकार ने देश को नाउम्मीद किया

एबीपी न्यूज से बातचीत में इमरान प्रतापगढ़ी ने नाउम्मीदी की वजह बताते हुए कहा कि सरकार ने पूरे देश को निराश किया है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब बजट से ज्यादा बाकी फाइलें देश के सामने दिख रही हैं. प्रतापगढ़ी ने कहा कि पहले बजट आए, उसके बाद चर्चा होगी, लेकिन पिछले अनुभव बताते हैं कि हर बार बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं और बाद में हालात उलट जाते हैं. उन्होंने वित्त मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले चीनी और दही खाकर बजट पेश किया जाता है और बाद में चीनी-दही के दाम बढ़ाकर चला दिया जाता है. उनके अनुसार यही कारण है कि इस बजट से उन्हें किसी तरह की उम्मीद नहीं है.

आम जनता के लिए क्या है बजट- रामाशंकर राजभर

सलेमपुर से लोकसभा सांसद रामाशंकर राजभर ने भी बजट को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश का एक बड़ा वर्ग कम से कम राशन पर जिंदा है, ऐसे में बजट से उनकी क्या उम्मीद हो सकती है. राजभर ने पूछा कि बेरोजगार नौजवानों के लिए, किसानों के लिए, व्यापारियों के लिए और असंगठित मजदूरों के लिए बजट में क्या है. उन्होंने कहा कि उद्योग-धंधों और आम लोगों के लिए बजट में स्पष्ट प्रावधान नजर नहीं आते. उनके मुताबिक बजट ऐसा होना चाहिए जो सभी वर्गों को आगे लेकर जाए, ताकि लोगों को सिर्फ राशन के सहारे जिंदा न रहना पड़े.

सांसद निधि पर भी उठाए सवाल

रामाशंकर राजभर ने आगे कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज नौवीं बार बजट पेश कर रही हैं, लेकिन नौ साल में एक भी बार सांसद निधि में बढ़ोतरी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि सांसदों को अपने क्षेत्रों में काम कराने में दिक्कत होती है और जनता के बीच उन्हें आलोचना झेलनी पड़ती है. राजभर ने सवाल उठाया कि अगर इस बजट में भी सांसद निधि नहीं बढ़ती है तो ऐसे बजट का क्या मतलब है.

AZMI DESK

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