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एटा का पटना पक्षी विहार बना अंतरराष्ट्रीय रामसर स्थल, स्थानीय लोगों में खुशी की लहर

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी विहार को अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल घोषित करने पर स्थानीय लोगों में खुशी है. एटा के पटना पक्षी विहार को रामसर स्थल घोषित करने से भारत की आर्द्रभूमि संरक्षण नीति को नई मजबूती मिली है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की.

उन्होंने कहा कि यह कदम भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है और वैश्विक मंच पर भारत की पर्यावरणीय भूमिका को मजबूत करेगा.

एटा वासियों को सीएम योगी आदित्यानाथ को दी बधाई

भारत के प्रधानमंत्री की इस घोषणा के साथ ही एटा जिला अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण मानचित्र पर दर्ज हो गया है. इस पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए एटा वासियों को बधाई दी है. इस घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश के एटा का पटना पक्षी विहार अब भारत की उन चुनिंदा आर्द्रभूमियों में से एक है. जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है. एटा जनपद में स्थित लगभग 108.86 हेक्टेयर में फैला पटना पक्षी विहार उत्तर प्रदेश की सबसे समृद्ध छोटी वेटलैंड्स में से एक है. यह आर्द्रभूमि हर साल सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करती है.

पक्षी विहार में 178 प्रजातियों के पक्षी को किया दर्ज

विशेषज्ञों और सर्वेक्षणों के अनुसार, इस पक्षी विहार में अब तक 178 प्रजातियों के पक्षी दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें भारतीय उपमहाद्वीप की 42 प्रजातियों में से 18 प्रजातियां नियमित रूप से देखी जाती हैं. प्रत्येक वर्ष यह क्षेत्र 50 हजार से अधिक पक्षियों का मौसमी आवास बनता है. जिससे यह उत्तर भारत के प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्रों में गिना जाता है.

पटना पक्षी विहार की जैव विविधता इसे और भी विशिष्ट बनाती है. यहां 44 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों के पक्षी पाए जाते हैं. यहां सूचीबद्ध पक्षी प्रजातियां भी पाई जाती हैं. सर्दियों में जब आसपास के खेत जलमग्न हो जाते हैं, तब यह झील ‘सारस केम’ के रूप में विकसित हो जाती है. जहां बड़ी संख्या में सारस पक्षियों का एकत्रीकरण देखने को मिलता है.

इको-टूरिज्म के रूप में तैयार हो रहा पक्षी विहार

साथ ही, यह आर्द्रभूमि केवल पक्षियों तक सीमित नहीं है. यहां 71 वनस्पति परिवारों की 252 पौध प्रजातियां, जिनमें 24 जलीय पौधें शामिल हैं, जो दर्ज की गई हैं. इसके अलावा नीलगाय, सियार, नेवला, मॉनिटर लिजर्ड, जंगली बिल्ली और साही जैसे वन्य जीव इस क्षेत्र की पारिस्थितिक समृद्धि को और सुदृढ़ करते हैं. पटना पक्षी विहार परिसर में स्थित प्राचीन भगवान शिव मंदिर धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से क्षेत्र को विशेष महत्व देता है. रामसर स्थल का दर्जा मिलने के बाद यह क्षेत्र अब इको-टूरिज्म, पर्यावरण शिक्षा, शोध कार्य और स्थानीय रोजगार की व्यापक संभावनाओं के नए दौर में प्रवेश कर चुका है.

गांव के ग्राम प्रधान ने पीएम मोदी को दी बधाई

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि पटना पक्षी विहार को मिली यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता भारत के ‘प्रकृति के साथ विकास’ के विजन को साकार करती है. इसके साथ ही यह उपलब्धि एटा जनपद को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाली एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गई है. पटना गांव के ग्राम प्रधान प्रतिनिधि हरेंद्र धनगर ने बताया कि पीएम मोदी को बहुत बधाई कि उन्होंने इसे रामसर स्थल घोषित किया. 

उन्होंने बताया कि इससे क्षेत्र में खुशी की लहर है. यहां 500/600 साल पुराना पूर्ण इच्छेस्वर महराज का प्राचीन मंदिर है. इसके सेवादार किसन ने बताया कि वे 30 साल से यहां सेवादार हैं और यहां का पूर्ण इच्छे स्वर भगवान का मंदिर 500/600 साल पुराना है. यह महाभारत कालीन मंदिर हैं यहां जरासंध ने पूजा की थी. यहां शंकर, सीताराम, राधेश्याम, गणेश, दुर्गा मां आदि देवी देवताओं की मूर्तीयां हैं.

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AZMI DESK

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