‘सही जांच हुई तो बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी जाएंगे जेल’ हाफ एनकाउंटर पर सपा का बड़ा हमला

उत्तर प्रदेश की पुलिस के हाफ एनकाउंटर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी ने भी योगी सरकार और पुलिस के तौरतरीकों पर सवाल उठाया है. सपा नेता उदयवीर सिंह कहा, “हर व्यक्ति को समझ आता है कि हर बार अपराधी पुलिस का हथियार छिनता है, भागने की कोशिश करता है और मारा जाता है. ये कहानियां जनता जान रही है. जब तथ्य सामने आएंगे तब बड़ी संख्या में हत्या करने वाले, लोगों को अपाहिज करने वालों को जेल जाना पड़ेगा. सजा देने का काम अदालतों का है. योगी और उनकी पुलिस सोचते हैं कि वे सारे निर्णय ले लेंगे तो फिर लोकतंत्र में नयायपालिका की क्या जरूरत.”
सपा नेता ने पुलिस के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार और पुलिस का पक्ष रखने के लिए कोर्ट में सरकारी वकील होते हैं, जिस कारण कई तथ्य छिपा लिए जाते हैं. अगर सही से जांच हो तो पुलिस के कई अधिकारी जेल में होंगे. उन्होंने कहा कि जिसमें अपराध किया है उसको सजा देने का काम अदालतों का है.
हाईकोर्ट ने क्या कहा ?
बता दें कि इलाहबाद हाई कोर्ट ने एक सुनवाई में यह कहा कि उसके सामने अक्सर ऐसे मामले आते हैं, जिनमें मामूली अपराधों में भी पुलिस अंधाधुंध गोलीबारी कर घटनाओं को मुठभेड़ का रूप दे देती है. यह टिप्पणी अदालत ने मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार और दो अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की जो अलग-अलग पुलिस मुठभेड़ों में घायल हुए थे. अदालत ने नोट किया कि इन घटनाओं में किसी भी पुलिसकर्मी को चोट नहीं आई, जिससे बल प्रयोग की आवश्यकता और अनुपातिकता पर सवाल उठते हैं.
डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब
अदालत ने आरोपियों के पैरों में गोली मारकर बाद में उसे मुठभेड़ बताने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि दंड देने का अधिकार केवल न्यायालयों के पास है, पुलिस के पास नहीं.कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब करते हुए पूछा है कि क्या पुलिस अधिकारियों को आरोपियों के पैरों या शरीर के अन्य हिस्सों में गोली मारने के संबंध में कोई मौखिक या लिखित निर्देश जारी किए गए हैं. अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मुठभेड़ अब एक नियमित घटना बनते जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों को खुश करना या आरोपियों को सबक सिखाना हो सकता है.



