अजित और शरद पवार की NCP में होने ही वाला था विलय, एक साथ आने में क्या है रुकावट, ऐसे समझें!

अजित पवार के निधन के बाद विलय को लेकर एनसीपी के दोनों गुटों में मतभेद पहले से ही सामने आने लगे हैं. एक तरफ शरद पवार की राष्ट्रवादी साथ आने को तैयार है. उनके नेता एकनाथ खड़गे, राजेश टोपे और अनिल देशमुख खुलकर इस बारे में मीडिया से कह रहे हैं और बार-बार इस पर बात कर रहे हैं. अब शरद पवार ने भी वही बात दोहराई है.
वहीं दूसरी ओर, अजित पवार गुट फिलहाल विलय नहीं चाहता है? इस सवाल पर अजित पवार गुट ने मीडिया से अब तक कोई बात नहीं की है. उनका लक्ष्य अभी सरकार में जगह बनानी यानी सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री का पद दिलाना है.
इसलिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों का तत्काल विलय होगा, ऐसा फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा है. सत्ता में शामिल अजित पवार गुट इस मुद्दे पर ज्यादा उत्सुक नजर नहीं आ रहा है, जबकि शरद पवार गुट अब भी विलय की उम्मीद लगाए बैठा है. हालांकि, शरद पवार गुट को अपेक्षित सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती नहीं दिख रही है.
अजित पवार 12 फरवरी को घोषणा करने वाले थे- शरद पवार
शरद पवार ने बारामती में कहा कि दोनों एनसीपी के विलय को लेकर खुद अजित पवार 12 फरवरी को घोषणा करने वाले थे. उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री बनने की कोई जानकारी नहीं है. इससे यह साफ हो रहा है कि अजित पवार गुट के नेता शरद पवार को साथ में लेकर काम नहीं कर रहे हैं या उनकी दखलअंदाजी भी नहीं चाहते हैं.
वे आनन-फानन में अपनी पार्टी का उपमुख्यमंत्री पद पा लेना चाहते हैं, ताकि आगे उनके कोई विधायक टूटें नहीं या इधर-उधर न जा पाएं. अजित पवार के जीवित रहते दोनों गुटों के बीच विलय को लेकर पांच–छह बैठकें हुई थीं.
शरद पवार गुट के नेताओं ने भी दोहराई विलय की बात
शरद पवार गुट के प्रदेशाध्यक्ष विधायक शशिकांत शिंदे ने भी कहा कि विलय को लेकर दोनों गुटों के बीच चर्चा हुई थी और स्वयं अजित पवार ने नगरपालिकाओं के चुनाव के बाद पार्टी विलय का प्रस्ताव रखा था. बाद में जिला परिषद चुनाव आ जाने के कारण यह मामला टल गया, लेकिन चुनाव के बाद फिर से बातचीत हुई और जिला परिषद चुनाव के बाद विलय करने पर सहमति बनी थी.
शिंदे के इस बयान को इस रूप में देखा जा रहा है कि वे यह संकेत देना चाहते हैं कि विलय अजित पवार की भी इच्छा थी और इसके जरिए वे अजित पवार गुट पर जल्द निर्णय लेने का दबाव बना रहे हैं.
अजित पवार गुट के लिए पार्टी का भविष्य जरूरी!
हालांकि, अजित पवार गुट फिलहाल विलय के बजाय अजित पवार के निधन के बाद उत्पन्न परिस्थितियों में पार्टी और सरकार में संतुलन बनाए रखने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है. 30 जनवरी को एनसीपी दफ्तर में प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने इस सवाल पर सिर्फ इतना कहा कि इस पर चर्चा बाद में होगी.
अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेता छगन भुजबळ ने भी मीडिया से कहा कि विलय को लेकर उनकी अपने नेताओं के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है. उन्होंने कहा, “फिलहाल हमारे सामने सबसे अहम मुद्दा विधायिका दल के नेता का चयन है.”
वहीं, इसी गुट के प्रदेशाध्यक्ष और सांसद सुनील तटकरे ने कहा, “हम इस समय शोक के माहौल में हैं. सभी विषयों पर चर्चा बाद में की जाएगी.” इस पूरे मामले में भाजपा की भूमिका अहम हो गई है. एनसीपी के दोनों गुटों के एकजुट होने के मामले में भाजपा की भूमिका भी अहम मानी जा रही है.
अजित पवार गुट के पास फिलहाल केवल एक लोकसभा सांसद सुनील तटकरे हैं, जबकि शरद पवार गुट के पास आठ सांसद हैं. यदि दोनों गुट एकजुट होकर एनडीए में शामिल होते हैं तो इसका फायदा भाजपा को केंद्र सरकार में मिल सकता है. हालांकि, इस विषय में भाजपा पर किसी तरह का सीधा दबाव नहीं है, लेकिन कुछ मामलों में राजनीतिक संतुलन साधना पड़ सकता है.
विलय की स्थिति में शरद पवार गुट के नेताओं को केंद्रीय या राज्य मंत्रिमंडल में कैसे शामिल किया जाए, यह सबसे बड़ा सवाल है. महाराष्ट्र में अजित पवार के अलावा केवल एक मंत्री पद रिक्त है, जो भाजपा के कोटे का है. यदि शरद पवार गुट के तीन–चार नेताओं को मंत्री बनाना हो, तो अजित पवार गुट के कुछ मंत्रियों से इस्तीफा लेना पड़ेगा. ऐसा करने पर अंदरूनी नाराजगी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
यह बात अजित पवार गुट के नेता भली-भांति जानते हैं. एक बात और कि शरद पवार गुट के साथ आने से अजित पवार गुट के कई नेताओं का कद और पद दोनों कम हो जाएगा. शरद पवार गुट में कई बड़े नाम और चेहरे हैं, जिनके साथ आने से अजित पवार गुट के नेताओं का कद छोटा पड़ जाएगा.
यही कारण है कि फिलहाल विलय पर अजित पवार गुट चुप्पी साधे हुए है. वह पहले अपने नेताओं को एकजुट कर सुनेत्रा अजित पवार को नेतृत्व देना चाहता है, ताकि विधायक और पदाधिकारी अजित पवार परिवार के प्रति निष्ठावान बने रहें. फिलहाल देखना होगा कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने के बाद एनसीपी में आंतरिक रूप से क्या स्थिति देखने को मिलती है.



