‘कोई भी मुसलमान मुख्यमंत्री से डरता नहीं’, CM हिमंत बिस्वा सरमा के बयान पर भड़के मौलाना रजवी

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने देश-विदेश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी है. उन्होंने एएनआई से बातचीत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बयान, मथुरा की कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मस्जिद मामले की सुनवाई, पाकिस्तान-बांग्लादेश के बीच सीधी उड़ानों की शुरुआत, उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी शरणार्थियों को जमीन देने के फैसले और मध्य प्रदेश में मस्जिदों के लाउडस्पीकर को लेकर दिए गए बयान पर खुलकर बात की.
एएनआई से बातचीत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने असम के मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि ‘बदन पर कफन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को शोभा नहीं देता. मुख्यमंत्री को मर्यादित भाषा का प्रयोग करना चाहिए. उन्होंने कहा कि असम का कोई भी मुसलमान मुख्यमंत्री से डरता नहीं है. मौलाना ने कहा कि एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल का बयान बिल्कुल सही है और अगर आने वाले चुनाव में बीजेपी ने हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में चुनाव लड़ा, तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है.
असम में 5 सालों से मुसलमानों को बनाया जा रहा निशाना- मौलाना शहाबुद्दीन रजवी
मौलाना रजवी ने आरोप लगाया कि असम में पिछले करीब पांच सालों में मुसलमानों को लगातार निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि मुसलमानों को बांग्लादेशी बताकर परेशान किया गया. जेल भेजा गया, मदरसों का दर्जा खत्म किया गया और कई जगहों पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई. उनका कहना था कि ऐसे कदमों से देश और दुनिया में गलत संदेश जाता है. जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिम देशों से अच्छे रिश्ते बनाना चाहते हैं. इसके अलावा कहा कि मथुरा की ईदगाह जमा मस्जिद से जुड़े मामले पर मौलाना ने कहा कि यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जो लंबे समय से चल रही है. उन्हें उम्मीद है कि अदालत का फैसला मस्जिद के पक्ष में आएगा और न्याय होगा.
बांग्लादेश में राजनीतिक बदलावों के बाद बदले हालात- मौलाना
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच 14 साल बाद सीधी उड़ानों की शुरुआत पर मौलाना ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मतभेद रहे हैं. खासकर 1971 के बाद. हाल के वर्षों में बांग्लादेश में राजनीतिक बदलावों के बाद हालात बदले हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हमले हुए हैं, जिस पर भारत ने कड़ा विरोध जताया. इसके बावजूद हर देश को यह अधिकार है कि वह अपने पड़ोसी देशों से अच्छे रिश्ते बनाए.
बांग्लादेशी शरणार्थियों को बसाने के फैसले का मौलाना ने किया स्वागत
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बांग्लादेशी शरणार्थियों को बसाने के फैसले का मौलाना रजवी ने स्वागत किया. उन्होंने कहा कि मेरठ में रह रहे 99 परिवारों को कानपुर के रसूलपुर गांव में बसाना इंसानियत और मानवता के लिहाज से अच्छा कदम है. इन लोगों को पहचान पत्र, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि 1971 में आए मुसलमानों को भी नागरिकता मिलनी चाहिए.
सिर्फ अजान के लिए होता है लाउडस्पीकर का इस्तेमाल
मध्य प्रदेश के एक विधायक द्वारा मस्जिदों में लाउडस्पीकर बंद करने के बयान पर मौलाना ने कहा कि लाउडस्पीकर का इस्तेमाल सिर्फ अजान के लिए होता है, जो मुश्किल से डेढ़ मिनट की होती है. उन्होंने कहा कि विधायक को नफरत की भाषा छोड़कर मोहब्बत और भाईचारे की बात करनी चाहिए, ताकि हिंदू-मुसलमान आपसी सौहार्द के साथ रह सकें.
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