‘हम क्या कर सकते हैं? एनसीपी के विलय की आहट पर INDIA गठबंधन का सीधा जवाब

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के फिर से एक होने की चर्चा और इस संभावना के बीच कि शरद पवार के नेतृत्व वाला एनसीपी (एसपी) गुट विलय के बाद सरकार में शामिल हो सकता है. विपक्षी INDIA गठबंधन की अन्य पार्टियों ने फिलहाल इंतजार और नजर बनाए रखने की नीति अपनाई है.
दिल्ली में कांग्रेस की सर्वोच्च संस्था ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि हम क्या कर सकते हैं. दोनों गुटों और पवार परिवार को ही फैसला लेना है. परिवार में हाल ही में एक वरिष्ठ सदस्य का निधन हुआ है. ऐसे समय में हम दखल नहीं देना चाहते और न ही कोई पहल करना सही समझते हैं. हम स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जैसे-जैसे हालात साफ होंगे, उसी के अनुसार कदम उठाएंगे.
एनसीपी के दोनों गुट 8 फरवरी को करने वाले थे घोषणा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुट 8 फरवरी को विलय की घोषणा करने वाले थे. लेकिन महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असमय निधन से इस प्रक्रिया को झटका लगा. अब शनिवार को एनसीपी विधायकों की बैठक बुलाई गई है. जिसमें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुने जाने की संभावना है. माना जा रहा है कि वह शनिवार शाम को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकती हैं.
एआईसीसी के नेता ने यह भी कहा कि यदि एनसीपी (एसपी) INDIA गठबंधन से बाहर जाती है, तो इसे जरूरी नहीं कि बड़ा नुकसान माना जाए. उन्होंने कहा कि कभी-कभी किसी का जाना भी गठबंधन के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है. राजनीति बहुत गतिशील होती है, इसमें भविष्यवाणी करना आसान नहीं है.
हालांकि, महाराष्ट्र से कांग्रेस के एक सांसद ने इस मुद्दे पर अलग राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर शरद पवार और उनकी पार्टी विपक्षी गठबंधन छोड़ती है, तो यह INDIA गठबंधन के लिए बड़ा झटका होगा. उन्होंने याद दिलाया कि शरद पवार ने 2019 में महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना (अब शिवसेना-यूबीटी) के साथ मिलकर महाविकास आघाड़ी गठबंधन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी.
संसद में प्रभावशाली वक्ता हैं सुप्रिया सुले-सांसद
सांसद ने कहा कि सुप्रिया सुले संसद में प्रभावशाली वक्ता हैं और दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक उनका खास सम्मान है. शरद पवार की राजनीतिक ताकत भले पहले जैसी न हो, लेकिन वह अब भी एक बड़े नेता हैं. वह जिस भी दल या गठबंधन में रहते हैं, उसकी मजबूती बनते हैं. अगर वे गठबंधन से जाते हैं, तो यह विपक्ष के लिए नुकसान होगा. लेकिन फिलहाल हम ज्यादा कुछ नहीं कर सकते.
महाराष्ट्र के एक अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने बताया कि पार्टी ने अभी तक पवार परिवार से कोई संपर्क नहीं किया है. उन्होंने कहा कि राज्य इकाई में यह तय किया गया है कि अभी पवार परिवार से बात करने का कोई मतलब नहीं है. पहले वे क्या फैसला लेते हैं, यह देखना जरूरी है. विलय की शर्तें और रूपरेखा अभी किसी को साफ तौर पर नहीं पता.
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने भी कहा कि यह समय राजनीतिक बातचीत का नहीं है. उन्होंने कहा कि परिवार इस वक्त गहरे दुख में है. यह पूरी तरह से एनसीपी का आंतरिक मामला है. ऐसे समय में किसी तरह की राजनीतिक चर्चा करना उचित नहीं है. शिवसेना (यूबीटी) के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने भी इसी तरह की बात दोहराई.
फिलहाल गठबंधन या कांग्रेस के पास करने के लिए कुछ खास नहीं- सपा सांसद
INDIA गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्टी के एक राज्यसभा सांसद ने भी कहा कि फिलहाल गठबंधन या कांग्रेस के पास करने के लिए कुछ खास नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर किसी सहयोगी दल में नाराजगी या असंतोष होता, तो बातचीत की जा सकती थी. लेकिन यहां मामला पूरी तरह आंतरिक है. दो परिवारों और दो गुटों का एक होना INDIA गठबंधन से जुड़ा मुद्दा नहीं है. इसलिए इसमें दखल देने का सवाल ही नहीं उठता.
उन्होंने यह भी जोड़ा कि बड़े गठबंधन में शामिल हर पार्टी को अपने आंतरिक फैसलों की पूरी स्वतंत्रता होती है. किसी पार्टी के अंदर क्या हो रहा है, इसका गठबंधन से सीधा संबंध नहीं होता. गौरतलब है कि फिलहाल एनसीपी (एसपी) के पास लोकसभा में 8 सांसद और राज्यसभा में 2 सांसद हैं. यदि दोनों गुटों का विलय होता है, तो संयुक्त एनसीपी के पास लोकसभा में 9 और राज्यसभा में 5 सदस्य हो जाएंगे. इससे संसद में एनडीए की संख्या और मजबूत हो सकती है. यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को विपक्षी राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
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