स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर FIR दर्ज कराने का मामला, कोर्ट ने कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज माघ मेले में विवाद के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्यों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दाखिल अर्जी पर सुनवाई हुई.अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संदीप पार्चा ने मामले की सुनवाई की. जिसमें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से पूरे मामले की जांच कर 6 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी है.
ये अर्जी श्रीकृष्ण जन्म भूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट मथुरा के अध्यक्ष आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से की गई थी, इस याचिका में शंकराचार्य और उनके शिष्यों पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं. अर्जी में कहा गया है कि माघ मेले में 18 जनवरी को निकली श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति यात्रा पर हमला किया गया.
शंकराचार्य और उनके समर्थकों पर लगाया आरोप
यह हमला स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के पास कथित रूप से किया गया. माघ मेले में हुए विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों ने आम रास्ते पर अवैध जाम लगाकर यात्रा रोकी. जब इसका विरोध किया गया तो उन लोगों पर सामूहिक रूप से हिंसक हमला किया गया. साथ ही उनका गला दबाकर जान से मारने की कोशिश की गई.
आशुतोष ब्रह्मचारी का आरोप है कि इस मारपीट के दौरान श्रीकृष्ण सेना के पदाधिकारी भी घायल हुए और ठाकुर श्री केशवदेव जी महाराज की प्रतिमा नीचे गिर गई. कोर्ट में दाखिल अर्जी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, अरविंद मिश्रा, मुकुंदानंद और कई दर्जन अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ झूंसी थाने में संबंधित धाराओं में प्राथिमिकी दर्ज कराने और मामले की जांच के निर्देश देने की मांग की गई है.
‘शंकराचार्य’ पद का किया दुरुपयोग
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस घटना के बाद उन पर फोन के जरिए लगातार शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया और जान से मारने की धमकी दी गई है. इसके साथ ही उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर शंकराचार्य पदनाम के दुरुपयोग करने और श्रद्धालुओं को गुमराह करने का आरोप लगाया.
आशुतोष ब्रह्मचारी ने इस मामले में कोर्ट से बीएनएस की धारा 175 के तहत फिर दर्ज करने का आदेश दिए जाने की मांग की गई है. 28 जनवरी को उनकी याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने पुलिस कमिश्नर प्रयागराज से पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है.



