Baramati Plane Crash: जिसने सिखाए राजनीतिक दांवपेच, उन्हीं चाचा से अजित पवार ने छीन ली थी NCP, जानें कब कैसे बदले रिश्ते

महाराष्ट्र के बारामती में बुधवार (28 जनवरी 2026) की सुबह एक विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत 6 लोगों की मौत हो गई. दावा किया गया कि यह हादसा उस समय हुआ, जब उनका विमान बारामती में लैंड कर रहा था. PTI के मुताबिक विमान उतरते समय दुर्घटनाग्रस्त हुआ.
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे और बारामती से जुड़े रहे. वे राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर विभिन्न पदों पर काम कर चुके थे और लंबे समय तक उपमुख्यमंत्री और NCP के वरिष्ठ नेता रहे.
चाचा शरद पवार ने सिखाई राजनीतिक कौशल
अजित पवार का राजनीतिक सफर अपने चाचा शरद पवार की देख-रेख में शुरू हुआ, जिन्होंने उन्हें राजनीतिक कौशल और संगठनात्मक रणनीति सिखाई और बारामती क्षेत्र को पारिवारिक राजनीतिक गढ़ बनाया. दोनों के बीच सियासी रिश्ते और बाद में राजनीतिक विभाजन ने महाराष्ट्र की राजनीति को कई मोड़ों पर प्रभावित किया.
1991 का लोकसभा चुनाव और शरद पवार के लिए त्याग
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक 1991 में अजित पवार ने बारामती लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया. यह जीत सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि शरद पवार की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा थी. बाद में अजित पवार ने यह सीट अपने चाचा शरद पवार के लिए खाली कर दी, ताकि वे केंद्र सरकार में रक्षा मंत्री बन सकें. यह फैसला दिखाता है कि उस दौर में अजित पवार पूरी तरह शरद पवार के नेतृत्व में काम कर रहे थे.
प्रशासनिक कौशल की पाठशाला
शरद पवार के साथ काम करते हुए अजित पवार ने प्रशासन के कई अहम सबक सीखे. तेज फैसले लेना, समय की पाबंदी, अधिकारियों और जनता दोनों से संतुलन बनाकर काम करना और संकट के समय कठोर लेकिन व्यावहारिक निर्णय लेना उनकी कार्यशैली का हिस्सा बना. शरद पवार का मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री के रूप में अनुभव अजित पवार के लिए एक जीवंत प्रशिक्षण जैसा रहा.
महाराष्ट्र की राजनीति में अजित पवार की अलग पहचान
समय के साथ अजित पवार ने खुद को केवल शरद पवार के भतीजे तक सीमित नहीं रखा. सिंचाई, वित्त और प्रशासन जैसे अहम विभागों में काम करते हुए उन्होंने अपनी तेज और सख्त कार्यशैली से अलग पहचान बनाई. लंबे समय तक वे महाराष्ट्र सरकार में सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे और बारामती क्षेत्र में उनका राजनीतिक वर्चस्व मजबूत होता गया.
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