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‘जमीन आवंटन रद्द करना है तो..’, माघ मेला प्रशासन के नोटिस पर बुरी तरह भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक और नोटिस भेजकर उनकी संस्था के भूमि आवंटन को रद्द करने की बात कही है, जिसके बाद ये विवाद और गहरा गया है. इस नोटिस पर शंकराचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा कि अगर उन्हें आवंटन रद्द करना है तो वो कर दें लेकिन ये बताएं कि पहले क्या सोचकर भूमि दी थी. 

शंकराचार्य ने एबीपी न्यूज से बात करते हुए मेला प्रशासन द्वारा भेजे गए दो-दो नोटिस पर कहा कि “नोटिस दो हैं लेकिन बात एक ही कही गई है. अगर उन्हें भूमि आवंटन रद्द करना है तो वो कर दें..ये उनका विशेषाधिकार है लेकिन, उन्हें ये बताना पड़ेगा कि क्या समझकर पहले ये दी गईं थी और क्या समझकर वापस कर रहे हैं. देते समय तुम्हारी अक्ल कहां गई थी या लेते समय कहां चली गई हैं? उनकी तो दोनों बातों में तो अंतर है. 

मेला प्रशासन के नोटिस पर बोले शंकराचार्य

इस पूरे विवाद में पीछे हटने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो अपने स्टैंड पर आज भी क़ायम है उनके पीछे हटने की कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा कि सौ करोड़ सनातन धर्मियों के सम्मान से हम कैसे पीछे हट जाएं? जो भी नोटिस आया है उसका जवाब दे दिया गया है दूसरा भी आया है उसका जवाब भी दे दिया गया है. 

‘सीएम योगी आदित्यनाथ लिखित आश्वासन दें’

शंकराचार्य ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा कि हमारा अगला या पिछला कदम कुछ नहीं है. सौ करोड़ सनातन धर्मियों के आचार्य का अपमान किया गया है. उस तरह सौ करोड़ सनातन धर्मियों को अपमानित करने की चेष्टा की गई है. जब तक सम्मान वापस नहीं मिलता है. हम अड़े रहेंगे. 

उन्होंने कहा कि अगर हम फिर से गंगा स्नान करने चले जाएं और वो फिर से हमें और हमारे समर्थकों को मारने लगे तो? हमें अपमानित करने लगे. इसलिए जब तक मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ये आश्वासन न दे दें कि ये नहीं होगा. लिखित रूप से साफ-साफ वचन न दें, उसी के बाद बात आगे बढ़ेगी. 

‘नोटिस पर नोटिस भेजकर हो रहा अपमान’

शंकराचार्य ने कहा कि जिन अधिकारियों ने मारा पीटा, जिन अधिकारियों ने ये व्यवहार किया है अब उन अधिकारियों का क्या मतलब है? उन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुआ बल्कि उन्हें और बढ़ावा दिया जा रहा है वो नोटिस पर नोटिस भेजकर और अपमानित करने का काम कर रहे हैं. हमारी छवि को जनता के बीच में ख़राब कर रहे हैं. जो प्रशासन गलती के बाद भी नहीं झुका है वो प्रशासन गिर गया है. ये इतिहास उठाकर देख लीजिए. 

शंकराचार्य का जमीन आवंटन होगा रद्द? मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को भेजा दूसरा नोटिस

AZMI DESK

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