Lung Cancer New Treatment: लंग कैंसर और मांसपेशियों की कमजोरी का एक साथ होगा इलाज, वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक

Can mRNA Therapy Treat Lung Cancer And Muscle Loss: अमेरिका केओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी के साइंटिस्ट ने एक ऐसी नई तकनीक विकसित की है, जो लंग्स के कैंसर और उससे जुड़ी एक गंभीर मांसपेशी क्षय बीमारी कैशेक्सिया का एक साथ इलाज करने की क्षमता रखती है. यह रिसर्च प्रतिष्ठित जर्नल जर्नल ऑफ कंट्रोल्ड रिलीज में प्रकाशित हुआ है और इसमें लिपिड नैनोपार्टिकल्स के जरिए जेनेटिक मैटेरियल को सीधे ट्यूमर तक पहुंचाने की नई रणनीति अपनाई गई है.
कैसे इसको तैयार किया गया?
इस तकनीक में वैज्ञानिकों ने खास तरह के नैनोकैरियर तैयार किए हैं, जिनमें फोलिस्टैटिन मैसेंजर RNA (mRNA) भरा गया है. जब ये नैनोपार्टिकल्स शरीर में पहुंचते हैं, तो यह mRNA सेल्स को फोलिस्टैटिन प्रोटीन बनाने के लिए प्रेरित करता है. यह प्रोटीन एक तरफ ट्यूमर की वृद्धि को रोकने में मदद करता है, वहीं दूसरी ओर मांसपेशियों के विकास को भी बढ़ावा देता है. रिसर्च टीम ने पाया कि ये लिपिड नैनोपार्टिकल्स खून में मौजूद विट्रोनेक्टिन नामक प्रोटीन से जुड़ जाते हैं. यही प्रोटीन इन्हें सीधे लंग्स के कैंसर वाले ट्यूमर तक पहुंचाने में मदद करता है. ट्यूमर की सतह पर मौजूद इंटीग्रिन रिसेप्टर्स के साथ इंटरैक्शन के जरिए ये नैनोपार्टिकल्स सही जगह पर जमा हो जाते हैं.
इसे भी पढ़ें- Rajasthan Mystery Illness: किस रहस्यमयी बीमारी ने राजस्थान में रोकीं 6 बच्चों की सांसें, जानें लक्षण और यह कितनी खतरनाक?
क्या कहते हैं साइंटिस्ट?
वैज्ञानिकों के अनुसार, शरीर में mRNA आधारित दवाओं को सीधे फेफड़ों के ट्यूमर तक पहुंचाना अब तक एक बड़ी चुनौती रहा है. लेकिन इस नई तकनीक ने इस समस्या का संभावित समाधान पेश किया है. पारंपरिक नैनोपार्टिकल्स अक्सर शरीर में जाकर लिवर में जमा हो जाते हैं, जबकि इस नई विधि से ट्यूमर के आकार में करीब 2.5 गुना ज्यादा कमी देखी गई. लंग्स का कैंसर दुनिया भर में सबसे घातक कैंसरों में से एक माना जाता है. इसके साथ अक्सर कैशेक्सिया नाम की स्थिति भी जुड़ी होती है, जिसमें मरीज का वजन तेजी से घटता है और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, चाहे वह पर्याप्त भोजन ही क्यों न ले रहा हो. यह स्थिति कैंसर मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है.
क्या कोई साइड इफेक्ट भी है?
इस नई थेरेपी की खास बात यह है कि यह एक साथ दो समस्याओं, कैंसर और मांसपेशी क्षय पर असर डालती है और शुरुआती परीक्षणों में इसके कोई गंभीर साइड इफेक्ट्स सामने नहीं आए हैं. हालांकि, साइंटिस्ट का कहना है कि अभी इस तकनीक पर और प्री-क्लिनिकल रिसर्च की जरूरत है, लेकिन शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक हैं. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में इस थेरेपी का मानवों पर परीक्षण किया जा सकेगा और यह कैंसर के इलाज में एक बड़ा बदलाव ला सकती है.
इसे भी पढ़ें- AIIMS Dry Eye Treatment: गाय के दूध से दूर होगी ड्राई आइज की दिक्कत, दिल्ली एम्स के ट्रायल में हुआ साबित
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
Check out below Health Tools-
Calculate Your Body Mass Index ( BMI )
Calculate The Age Through Age Calculator



