Kidney Health: यूरिक एसिड vs क्रिएटिनिन…किडनी की हेल्थ के दो अहम संकेत, जिन्हें समझना है जरूरी

Kidney Health: आजकल लोग अपनी सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं. वे समय-समय पर कई तरह के टेस्ट भी करवाते हैं, जिससे उन्हें अपनी हेल्थ को लेकर अपडेट मिलता है रहे और बीमारियों का सही समय पर इलाज हो सके. हालांकि, जब बॉडी चेकअप की रिपोर्ट हाथ में आती है तो कई भारी-भरकम शब्दों को समझना आसान नहीं होता. खासकर यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन जैसे नाम लोगों को कंफ्यूज कर देते हैं. कई लोग सोचते हैं कि ये दोनों एक ही चीज बताते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि ये दोनों शरीर की अलग-अलग स्थितियों के बारे में जानकारी देते हैं.
डॉक्टर्स के अनुसार, जब हम किसी व्यक्ति की लैब रिपोर्ट देखते हैं तो यूरिक एसिड और क्रिएटिनिन जैसे नाम अक्सर साथ में दिखाई देते हैं. दो शब्द किडनी से जुड़े होते हैं, लेकिन ये आपकी सेहत के बारे में दो बिल्कुल अलग कहानियां बताते हैं. ऐसे में इनकी सही जानकारी होना काफी आवश्यक हो जाता है.
क्रिएटिनिनः किडनी के काम करने की जांच
क्रिएटिनिन एक वेस्ट प्रोडक्ट होता है, जो तब बनता है जब हमारी मांसपेशियों ऊर्जा का प्रयोग करती हैं. शरीर इसे हर दिन लगभग एक समान मात्रा में बनाता है. स्वस्थ किडनी इसे खून से फिल्टर करके पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है. यही वजह है कि डॉक्टर क्रिएटिनिन के स्तर को किडनी की कार्यक्षमता मापने का एक भरोसेमंद संकेत मानते हैं. इसे आसान शब्दों में बताएं तो क्रिएटिनिन को किडनी का ‘स्पीडोमीटर’ समझें. यह मांसपेशियों के टूटने से बनने वाला वेस्ट प्रोडक्ट है, जिसे स्वस्थ किडनी एक स्थिर दर से बाहर निकालती है. वहीं, अगर क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ जाता है तो यह अक्सर संकेत देता है कि किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है, जिससे डिहाइड्रेशन या किडनी से जुड़ी बीमारी के कारण हो सकते है.
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यूरिक एसिडः मेटाबॉलिज्म को समझने का एक तरीका
वहीं दूसरी ओर, यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है. प्यूरीन हमें कई खाद्य पदार्थों से मिलता है, जैसे- रेड मीट, सी-फूड, शराब और यहां तक कि कुछ हेल्दी फूड्स जैसे दालों में. यूरिक एसिड का स्तर डाइट, लाइफस्टाइल और मेटाबॉलिज्म के अनुसार बदलता रहता है. डॉ. अंकुर सिंघल बताते हैं कि यूरिक एसिड एक “मेटाबॉलिक मैसेंजर” की तरह काम करता है. यह तब बनता है जब आपका शरीर कुछ खास खाने-पीने की चीजों में मौजूद प्यूरीन को तोड़ता है. अगर यूरिक एसिड का स्तर ज्यादा हो जाए तो हमेशा किडनी की समस्या नहीं होती, बल्कि यह अक्सर आपकी लाइफस्टाइल की आदतों की ओर इशारा करता है. जैसे कम पानी पीना, ज्यादा शुगर लेना या मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याएं इसका कारण बन सकती हैं.
तो अक्सर लोग कन्फ्यूज क्यों हो जाते हैं?
अगर दोनों की तुलना करें तो क्रिएटिनिन एक आसान सवाल का जवाब देता है कि क्या किडनी खून को सही तरीके से फिल्टर कर रही है? वहीं यूरिक एसिड एक थोड़ा बड़ा सवाल पूछता है कि शरीर मेटाबॉलिज्म और खाने-पीने से बनने वाले वेस्ट को कैसे संभाल रहा है? यानी क्रिएटिनिन से किडनी की स्थिति का पता चलता है और यूरिक एसिड से हमारी आदतों का. डॉक्टरों का कहना है कि इन दोनों रिपोर्ट्स को हमेशा साथ में समझना चाहिए, सिर्फ एक को देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता. कई बार दोनों का स्तर एक साथ बढ़ जाता है जो किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है.
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