राजनीति

केरल विधानसभा चुनाव में उतरें एक नाम के कई उम्मीदवार, चुनावी जंग से पहले कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन

Kerala Assembly Elections 2026: केरल विधानसभा चुनाव 9 अप्रैल, 2026 को होने वाला है. इस चुनाव के लिए जैसे-जैसे प्रचार तेज हो रहे हैं, वैसे-वैसे कई बड़े उम्मीदवारों को एक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. केरल के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में एक जैसे या मिलते-जुलते नामों वाले निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतर आए हैं. यहां की राजनीतिक शब्दावली में ऐसे उम्मीदवारों को ‘अपरनमार’ या ‘नाम के जुड़वां’ कहा जाता है. प्रमुख राजनीतिक दलों का कहना है कि ये उम्मीदवार मतदाताओं को भ्रमित कर सकते हैं और कड़े मुकाबले वाले सीटों के नतीजों पर असर डाल सकते हैं. 

मुख्यमंत्री दोबारा लड़ रहे हैं चुनाव

धर्मदम विधानसभा क्षेत्र से केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं, क्योंकि, पास के चेडीचेरी से विजयन ए.एम. नाम के एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी अपना नामांकन दाखिल किया है. EVM पर दो विजयन के नाम आने से मतदाताओं में कन्फ्यूजन होने की संभावना जताई जा रही है. यही वजह है कि मुख्यमंत्री की पार्टी CPM के कार्यकर्ताओं ने अपने सभी चुनावी रैलियों में पार्टी के चुनाव चिह्न को प्रमुखता से दिखाने के प्रयास को तेज कर दिया है. साथ-ही कई मंत्रियों को भी ऐसी ही स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है.

एक ही सीट पर एक ही नाम के 2 उम्मीदवार

बेपोर से पी.ए. मोहम्मद रियास चुनाव लड़ रहे हैं और उनके सामने मोहम्मद रियास पी.सी. और मोहम्मद रियास टी.टी. नाम के दो निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में उतरे हैं. कलामसेरी में पी. राजीव का मुकाबला राजीव नाम के एक दूसरे उम्मीदवार से है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी इस चुनावी चलन से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं. हरिपाद में रमेश चेन्निथला का मुकाबला रमेश सी. नाम के एक निर्दलीय उम्मीदवार से हो रहा है. 

वट्टियूरकावु में कांग्रेस नेता के. मुरलीधरन भी पी. मुरलीधरन नाम के एक दूसरे उम्मीदवार के साथ चुनावी मैदान में हैं. मौजूदा विधायक वी.के. प्रशांत का सामना प्रशांत के से है. भाजपा भी इस चलन से अछूती नहीं रही है. एनडीए के उम्मीदवार राजीव चंद्रशेखर नेमोम से चुनाव लड़ रहे हैं और यहां भी जी.एस. राजीव कुमार नाम के एक निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल किया है. BJP के प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन को भी मंजेश्वरम में ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ रहा है. दरअसल, मंजेश्वरम का ये मुकाबला राजनीतिक यादें ताजा कर रहा है. साल 2016 में सुरेंद्रन ये विधानसभा सीट महज 89 वोटों से हार गए थे. तब भाजपा के नेताओं ने एक जैसे नाम वाले उम्मीदवारों की मौजूदगी को हार का एक संभावित वजह बताया था.

AZMI DESK

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