राजनीति

जोरहाट में कांग्रेस गठबंधन की उम्मीदवार ने दिखाया दम, ज्ञानश्री बोरा ने दाखिल किया नामांकन; क्या भेद पाएंगी BJP का किला?

असम में चुनावी माहौल जोर पकड़ चुका है. यहां मारियानी और जोरहाट में शुक्रवार को शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला. यहां कांग्रेस-रायजोर दल गठबंधन की उम्मीदवार डॉ. ज्ञानश्री बोरा ने विधानसभा चुनावों लिए अपना नामांकन दाखिल किया. चुनावी शोरगुल के बीच मरियानी विधानसभा राजनीतिक अखाड़ा बन चुका है. नामांकन रैली के दौरान बड़ी भीड़ डॉ. बोरा के समर्थन में देखने को मिली. इस दौरान एक भव्य रैली भी निकाली गई. इसमें सैकड़ों समर्थकों ने हिस्सा लिया. ढोल की थाप, नारों और जबरदस्त उस्ताह समर्थकों में देखने को मिला. जोरहाट के कमिश्नर ऑफिस में नामाकंन दाखिल किया गया. 

डॉ. बोरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यदि जनता उन्हें चुनती है, तो वह विधानसभा के हर सत्र में मारियानी से जुड़े मुद्दे उठाएंगी. साथ ही कहा कि उनकी प्राथमिकता लोगों की आवाज प्रभावी ढंग से सुनी जाने को लेकर रहेगी. साथ ही लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को हल करने के लिए ठोस कदम उठाएंगी. 

जनसेवा को समर्पित रहेगी मेरी राजनीति: डॉ. बोरा

डॉ. बोरा ने कहा कि राजनीति में आने का फैसला विधानसभा के लोगों के लिए जनसेवा और मारियानी के विकास करने को लेकर रहेगा. उन्होंने असम-नागालैंड सीमा विवाद, पीने के पानी की कमी, सड़कों की खराब हालत और बेरोजगारी जैसे मुद्दे को प्राथमिकता देने को लेकर रेखांकित किया. 

इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में मौजूदा विधायक रूप ज्योतिकुर्मी पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि पिछले 25 सालों में बार-बार मौके देने के बाद भी मारियानी से जुड़ी समस्याओं को विधानसभा में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया. साथ ही कहा कि जहां एक ओर जनता इन सालों में उनकी स्थिति को मजबूत किया है, वहीं दूसरी ओर इस निर्वाचन क्षेत्र की आवाज बड़े पैमाने पर अनसुनी रही है. 

क्यों अहम है मरियानी विधानसभा? 

मरियानी विधानसभा का ये मुकाबला इसलिए भी अहम है, क्योंकि मौजूदा विधायक रूप ज्योति कुर्मी इस क्षेत्र से पांच बार से विधायक हैं. उन्होंने 2021 में बीजेपी में शामिल होने से पहले कांग्रेस नेता के तौर पर यह सीट जीती थी. पार्टी बदलने के बाद उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ा. उपचुनाव में फिर से जीत हासिल की. इससे इलाके में उनकी स्थिति और मजबूत हो गई. इसके अलावा डॉ. बोरा ने इलाके में बदलाव की लहर की ओर इंगित किया है. उन्होंने दावा किया कि उन्हें अलग-अलग पंचायतों से बड़े पैमाने पर समर्थन मिल रहा है. जनता से मिल रहे इस समर्थन ने चुनावी नतीजों को अपने पक्ष में आने के उनके विश्वास को ओर मजबूत कर दिया है. 

इसके अलावा उन्होंने सरकार पर संवैधानिक अधिकारों, और अभिव्यक्ति की आजादी पर दबाव डालने का भी आरोप लगाया. साथ ही धर्म और जाति की राजनीति की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यह चुनाव विपक्षी पार्टियों के लिए एक सामूहिक लड़ाई होगी. यह जनता के लिए लड़ी जाने वाली लड़ाई है. आखिरकार जीत जनता की ही होगी. अगर वह चुनी जाती हैं, तो वे विधानसभा में मारियानी से जुड़े मुद्दे उठाएंगी. दरअसल, मारियानी बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है. लेकिन ऐसे में सवाल है कि डॉ. ज्ञानश्री बोरा मतदाताओं का भरोसा जीत पाएगा?

यह भी पढ़ें: असम चुनाव: कांग्रेस ने जारी की उम्मीदवारों की तीसरी लिस्ट, 22 प्रत्याशियों का किया ऐलान

AZMI DESK

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