आजमगढ़

Azamgarh News: घोर लापरवाही के बीच बिना प्रश्नपत्र के शुरू हुई प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की परीक्षा, शिक्षक लौटे निराश,बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

आजमगढ़ बलरामपुर से बबलू राय

घोर लापरवाही के बीच बिना प्रश्नपत्र के शुरू हुई प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की परीक्षा, शिक्षक लौटे निराश,बच्चों के भविष्य से खिलवाड़

आजमगढ़ जनपद के शिक्षा क्षेत्र बिलरियागंज में सोमवार को प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूलों की वार्षिक परीक्षा भारी अव्यवस्था और घोर लापरवाही के बीच शुरू हुई। स्थिति इतनी बदतर रही कि कई विद्यालयों के अध्यापक प्रश्नपत्र ही नहीं ले सके और बिना पेपर के ही वापस अपने-अपने विद्यालय लौटने को मजबूर हो गए। इससे न केवल शिक्षकों में रोष देखा गया, बल्कि बच्चों और अभिभावकों के भविष्य को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार बिलरियागंज शिक्षा क्षेत्र के कुल 145 विद्यालयों में सोमवार को परीक्षा आयोजित होनी थी। जूनियर हाई स्कूलों में शारीरिक शिक्षा और कृषि विज्ञान की परीक्षा निर्धारित थी, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में मौखिक परीक्षा का आयोजन किया जाना था। लेकिन परीक्षा के पहले ही दिन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त दिखाई दी।
सुबह करीब 9 बजे बीआरसी पटवध कौतुक केंद्र पर जब पत्रकार पहुंचे तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। पूरा बीआरसी कार्यालय लगभग स्टाफ विहीन पड़ा था। मौके पर केवल एक कर्मचारी पुनीत श्रीवास्तव मौजूद थे, जबकि बाकी अधिकारी और जिम्मेदार कर्मचारी नदारद थे। इस दौरान विभिन्न विद्यालयों से आए अध्यापकों का पेपर लेने के लिए लगातार आना-जाना लगा हुआ था।
बताया गया कि प्रश्नपत्र रविवार शाम लगभग 6 बजे बीआरसी केंद्र पर पहुंचे थे और सोमवार सुबह अध्यापकों को उन्हें लेने के लिए बुलाया गया था। लेकिन वितरण की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण जो शिक्षक पहले पहुंच गए, वे अधिक मात्रा में पेपर लेकर चले गए, जबकि बाद में पहुंचे कई अध्यापकों को एक भी प्रश्नपत्र नहीं मिल सका। परिणामस्वरूप बिना पेपर लिए शिक्षकों में प्रशांत सिंह पिपरहा, विनोद मौर्य कपसा, ओमप्रकाश पाती खुर्द, संध्या राय मानपुर, राजेश राय पटवध कौतुक सेकंड तथा ज्ञान शंकर राय पटवध कौतुक फस्ट तथा और बहुत सारे शिक्षक शिक्षिकाएं निराश होकर वापस लौटते रहे। पेपर वितरण की जिम्मेदारी नोडल टीम को दी गई थी, लेकिन मौके पर कोई नोडल अधिकारी भी मौजूद नहीं मिला। इससे अव्यवस्था और अधिक बढ़ गई। शिक्षकों का कहना था कि यदि पहले से उचित योजना बनाकर पेपर विद्यालयों तक पहुंचा दिए जाते तो ऐसी स्थिति पैदा ही नहीं होती।
मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारी जगदीश यादव से संपर्क करने की कोशिश की गई तो कई बार फोन मिलाने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इसके बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी राजीव पाठक से संपर्क किया गया। उन्होंने फोन उठाकर पूरे मामले की जानकारी ली और कहा कि वे तुरंत खंड शिक्षा अधिकारी से वार्ता कर स्थिति की जानकारी ले रहे हैं। सरकारी नियमों के अनुसार परीक्षा के प्रश्नपत्र सभी विद्यालयों तक समय से पहुंचाना विभाग की जिम्मेदारी होती है, ताकि परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न हो सके। लेकिन बिलरियागंज में जो स्थिति सामने आई, वह शिक्षा विभाग की गंभीर लापरवाही को उजागर करती है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि जब परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में भी ऐसी अव्यवस्था होगी, तो बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित रहेगा। सरकार द्वारा शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
गौरतलब है कि पहले इस तरह की व्यवस्थाएं टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ठेकेदारों द्वारा संचालित होती थीं, जिसमें समय से किताबें, कॉपियां और परीक्षा के प्रश्नपत्र बीआरसी केंद्रों पर उपलब्ध करा दिए जाते थे। लेकिन अब व्यवस्थाएं बदलने के बाद भी विभागीय जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं दिख रही है। फिलहाल सवाल यह है कि जिन विद्यालयों में प्रश्नपत्र ही नहीं पहुंचे, वहां बच्चों की परीक्षा कैसे होगी? क्या उनकी परीक्षा दोबारा होगी या फिर किसी अन्य तरीके से औपचारिकता पूरी की जाएगी। इस पूरी घटना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।

AZMI DESK

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