‘क्या करें रोजगार तो करना ही है…’, कमर्शियल LPG सिलेंडर की किल्लत पर छलका चाय वाले का दर्द

‘कमर्शियल सिलेंडर बंद हो गया है, कोई भी सिलेंडर नहीं मिल रहा है, केवल ये लास्ट सिलेंडर बाकी है, उसके बाद मेरे पास गैस खत्म है..पुरानी व्यवस्थाओं पर जा रहे हैं. अब कोयले की भट्टी बनवाएंगे और उसी पर चाय बनाएंगे…क्या करें रोजगार तो करना ही है, चाहें जैसे हो करना ही होगा वरना कुछ और व्यवस्था करता….’
लखनऊ में चाय की दुकान चलाने वाले शिवपाल जब ये लाइनें बोलते हैं तो उनकी आवाज में बेबसी, दर्द, उम्मीद और वह डर साफ सुनाई देता है, जो शायद उनके रोजगार को आने वाले समय में प्रभावित करने वाला है, उन्होंने अपना दर्द, अपना डर और अपनी हकीकत बिना किसी बदलाव के शब्द-दर-शब्द बयां की. क्या सच में कमर्शियल गैस का मुद्दा इतना गंभीर हो चुका है, क्यों लोग डरे हुए हैं और अचानक से उनकी जिंदगी में ये गैस की किल्लत भूचाल लेकर कैसे आ गई. इन सवालों का जवाब जानने और जमीनी हकीकत से रूबरू होने के लिए पूरी व्यवस्था को नजदीक से परखना जरूरी है.
#WATCH | Lucknow | Shivpal, the tea stall owner, says, “I am getting a coal furnace made here so that my business continues to operate. I am operating on the last cylinder today, and from tomorrow I will use this ‘bhatti’.” pic.twitter.com/zo0XzaV3EK
— ANI (@ANI) March 11, 2026
US-ईरान जंग से गैस पर मंडराया संकट
दरअसल यूएस-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध के चलते हॉर्मुज जलमार्ग के रास्ते सप्लाई ठप हो चुकी है. यही वजह है कि देश में एलपीजी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र और राजस्थान तक कई राज्यों में कॉमर्शियल गैस की सप्लाई पर रोक लगाई गई है. ऐसे में कई शहरों में होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय की दुकान चलाने वाले छोटे दुकानदारों की भी परेशानियां बढ़ी हैं.
सरकार ने लागू किया ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’
केंद्र सरकार ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए तैयारियां कर ली हैं. गैस समेत जरूरी चीजों की जमाखोरी रोकने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955’
लागू किया गया है. गैस को चार कैटेगरी में बांटा गया है. पहली कैटेगरी में घरों में सप्लाई की जाने वाली पीएनजी, गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली सीएनजी शामिल है, जिस पर कोई भी प्रभाव नहीं पड़ेगा. दूसरी कैटेगरी में खाद कारखाने हैं, जहां 70 फीसदी गैस दी जाएगी. तीसरी कैटेगरी में बड़े उद्योग (चाय फैक्ट्रियां, और बड़े उद्योग हैं) जिनको जरूरत की करीब 80 फीसदी गैस मिलेगी. जबकि चौथी कैटेगरी में शहरों के गैस नेटवर्क से जुड़ी छोटी फैक्ट्री, होटल-रेस्टोरेंट को करीब 80 फीसदी गैस दी जाएगी.
भारत LPG पर कितना निर्भर है?
भारत की LPG पर निर्भरता देखें तो सालाना करीब 33.15 मिलियन मीट्रिक टन खपत सालाना होती है. जिसका करीब 67 फीसदी आयात किया जाता है. मिडिल ईस्ट से कुल आयात का करीब 80 से 90 फीसदी हिस्सा इम्पोर्ट होता है.
पीएम मोदी बोले- भारत इस क्राइसिस के लिए तैयार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (10 मार्च) को कैबिनेट बैठक में मंत्रियों से साफ कहा कि वैश्विक उथल-पुथल के बीच में जनता का भरोसा कायम रखें. कहा, भारत के पास पर्याप्त स्टॉक है. पीएम ने कहा कि इस क्राइसिस के लिए सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया गया है, मंत्री ये लोगों के बीच जाकर बताएं.’
सरकार की ओर से उठाए गए जरूरी कदम
भारत ने कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के लिए रणनीति में बदलाव किया है. सरकार की ओर से कॉमर्शियल और घरेलू एलपीजी (LPG) सप्लाई को प्राथमिकता पर रखा है. रेस्टोरेंट एसोसिएशन की दिक्कतों को समझते हुए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को उनसे बातचीत करने के निर्देश दिए गए हैं. एक हाई-लेवल कमेटी भी बनाई गई है, जो आपूर्ति की निगरानी कर रही है. साथ ही घरेलू उत्पादन को बढ़ाया गया है और आयात के लिए वैकल्पिक समुद्री रास्तों का उपयोग कर अपनी निर्भरता को सुरक्षित कर लिया है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक बीते दो दिन में एलपीजी का प्रोडक्शन 10 फीसदी बढ़ा है.
सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि एलपीजी, पेट्रोल-डीजल की देश में कोई किल्लत नहीं है और लोगों को अफवाहों से बचने की अपील की गई है. कहीं अगर दिक्कत है तो यह सप्पाई चेन में दिक्कत वजह हो सकता है.कहा गया कि देश में सभी पेट्रोल पंप और एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास सप्लाई के लिए पहले की तरह ही ईंधन उपलब्ध है. यह भी कहा गया कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिलेगी. सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस क्राइसिस से पहले भी रोजाना 60 लाख गैस सिलेंडर का वितरण किया जाता था और अभी भी हर दिन उतना ही वितरण किया जा रहा है.
केंद्रीय गृह सचिव ने राज्यों के डीजीपी-सचिवों से की बात
केंद्रीय गृह सचिव ने सभी राज्यों के डीजीपी और राज्यों के सचिवों से बातचीत की जिस तरीके के हालात बने हुए हैं, उनको लेकर और कहा है कि वह यह सुनिश्चित करें कि किसी भी तरीके से जमाखोरी और कालाबाजारी को लेकर सख्त कदम उठाएं.



