Telangana Municipal Elections 2026: तेलंगाना नगर निकाय चुनाव, चौतुप्पल में ‘वोटिंग का तूफान’, करीमनगर में मतदान सुस्त; जानें कौन-कौन रहा आगे

तेलंगाना में नगर निकाय चुनावों के लिए सोमवार (9 फरवरी) को हुए मतदान के बाद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. राज्य भर में कुल 73.01 प्रतिशत मतदाताओं ने अपना मताधिकार प्रयोग किया. सबसे हैरान करने वाली खबर यह है कि जहां बड़े निगमों (Corporations) में मतदाताओं ने थोड़ा संकोच दिखाया, वहीं छोटी नगर पालिकाओं (Municipalities) ने जबरदस्त उत्साह के साथ मतदान का रिकॉर्ड तोड़ दिया.
इस बार सबसे सनसनीखेज प्रदर्शन चौतुप्पल का रहा, जहां 91.91 प्रतिशत मतदान ने सबको चौंका दिया. आंकड़ों की बात करें तो निगम सीमाओं में औसतन 66.05 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि नगर पालिकाओं में यह आंकड़ा 75.88 प्रतिशत रहा. अगर हम निगमों की बात करें तो नालगोंडा निगम ने 77.36 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे ऊंचा स्थान हासिल किया.
करीमनगर में वोटिंग सुस्त
करीमनगर निगम में सिर्फ 59.12 प्रतिशत लोगों ने ही वोट डाला, जो इन चुनावों में सबसे कम मतदान वाला इलाका साबित हुआ. यह अंतर साफ तौर पर दिखाता है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में छोटे कस्बों और कस्बाई इलाकों के लोग बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय शासन को लेकर कितने गंभीर और जागरूक हैं. खासतौर पर चौतुप्पल नगर पालिका में देखे गए 91.91 प्रतिशत मतदान ने इतिहास रच दिया है, जो पिछले कई चुनावों में सबसे ज्यादा है.
स्थानीय चुनावों में दिख रहा बदलाव
पिछले कुछ वर्षों में तेलंगाना के स्थानीय चुनावों में काफी बदलाव देखने को मिला है. पहले के मुकाबले अब मतदाता ज्यादा सचेत हैं और वे सत्ता पक्ष या विपक्ष को चुनने से पहले जमीनी मुद्दों जैसे पानी, सड़कें और सफाई पर गौर कर रहे हैं. निगम वाले इलाकों में आमतौर पर मतदान प्रतिशत कम रहता है, जिसे अक्सर ‘शहरी उदासीनता’ का नाम दिया जाता है और करीमनगर का आंकड़ा इसका जीता-जागता उदाहरण है, लेकिन इस बार नगर पालिकाओं में जो बवाल मतदान हुआ, उसने राजनीतिक विश्लेषकों के लिए खोज का विषय जरूर पैदा कर दिया है.
यह मतदान न केवल लोकतंत्र की जीत है, बल्कि यह संकेत भी है कि महानगरों की चमक-धमक से दूर, असली भारत या तेलंगाना की आवाज अब ज्यादा ताकतवर हो रही है. नतीजतन चुनाव आयोग ने बताया कि मतदान के दौरान कहीं भी कोई बड़ी हिंसक घटना नहीं हुई और पूरा प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई. अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं, जो बताएगी कि आम जनता का यह जबरदस्त उत्साह किसके समर्थन में बदलता है. ये चुनाव तेलंगाना की स्थानीय राजनीति का नया मुआयना करने में मदद करेंगे.
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